नंदीग्राम हार के बाद भी ममता बनर्जी की CM बनने में नहीं है कोई दिक्कत

नई दिल्ली: टीएमसी सुप्रीमो भले ही चुनाव हार गई हैं, लेकिन मुख्यमंत्री बनने में कोई परेशानी नहीं है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने प्रचंड जीत हासिल की है। हालांकि ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम सीट से चुनाव हार गई हैं। शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें करीब 1700 मतों से चुनाव हराया है। हालांकि ममता और उनकी पार्टी ने कहा है कि वह इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगी।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत वह मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकती हैं। अनुच्छेद 164 (4) कहता है, “एक मंत्री जो लगातार छह महीने तक राज्य के विधानमंडल का सदस्य नहीं है, उसे पद छोड़ना पड़ेगा।” इसका मतलब यहा है कि ममता बनर्जी को छह महीने के भीतर किसी विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर आना होगा। 2011 में भी जब ममत बनर्जी ने पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब वह संसद सदस्य थीं। उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। कुछ महीनों के बाद, वह भबानीपुर से चुनी गई।

कांग्रेस नेता और कानूनी विशेषज्ञ अभिषेक सिंघवी ने कहा, “कानूनी रूप से और नैतिक रूप से किसी को भी ममता बनर्जी के सीएम बनने और छह महीने के भीतर चुने जाने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। यदि कोई भी इसे मुद्दा बनाता है, तो यह उसके भारतीय संविधान के ज्ञान की कमी को दर्शाएगा। ”

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