नई शिक्षा नीति से बच्चे बनेंगे हुनरमंद: उच्च शिक्षा मंत्री नीलिमा कटियार

कानपुर। देशभर के शिक्षाविद विगत अनेक दशकों से देश की शिक्षा नीति में आमूलचूल परिवर्तन हेत मांग कर रहे थे। शिक्षाविदों की मांग थी कि देश की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे युवा पीढ़ी सिर्फ नौकरियों के पीछे ना भागकर, शिक्षा संस्थानों के अंदर ही ऐसी तकनीक सीखे जो जीवनोपयोगी हो। न सिर्फ अपना भविष्य उज्जवल बनाएँ अपितु देश के नवनिर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ। यह नई शिक्षा नीति इसी मांग को पूरी करेगी और आगामी पीढ़ी को हुनरमंद बनाएगी। इससे देश में बच्चे हुनरमंद बनेंगे और नौकरियों के पीछे न दौड़ कर आत्मनिर्भर बनेंगे तथा देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। नई शिक्षा नीति लंबे समय से प्रतीक्षारत सार्थक बदलावों के साथ सामने आई है। निश्चित रूप से इससे देश का भविष्य उज्जवल होगा। “यह उद्गार विशिष्ट वक्ता की आसंदी से उत्तर प्रदेश राज्य की उच्च शिक्षा मंत्री नीलिमा कटियार ने व्यक्त किए, मौका था ‘नई शिक्षा नीति 2020 पर आयोजित गोष्ठी का।

दून इंटरनेशनल स्कूल रतनलाल नगर में कानपुर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, कानपुर सहोदया स्कूल्स तथा दून इंटरनेशनल स्कूल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह गोष्ठी भारत सरकार दवारा घोषित नई शिक्षा नीति पर विचार विमर्श हेतु आयोजित की गई थी, जिसमें सीबीएसई,आईसीएसई तथा यूपी बोर्ड से संबद्ध 250 से भी अधिक विद्यालयों के प्राचार्यों एवं प्रबंधकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के प्रारंभ में दून इंटरनेशनल स्कूल की प्राचार्या डॉक्टर कृष्णा चौहान ने कार्यक्रम में पधारे प्रतिनिधियों एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य शिक्षा एवं तकनीक का समन्वय करना है। यह शिक्षा नीति नई पीढ़ी को विदयालय में ही हुनरमंद बनाने की शुरुआत करेगी तथा बच्चों को आत्मनिर्भरता का पाठ सिखाएगी। बच्चे विद्यालय परिसर में ही हुनरमंद बनेंगे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सिटी कोऑर्डिनेटर सीबीएसई एवं कानपुर सहोदया स्कूल्स के अध्यक्ष तथा गुरु नानक मॉडर्न पब्लिक स्कूल के प्राचार्य सरदार बलविंदर सिंह ने नवीन शिक्षा नीति 2020 की गंभीर विवेचना करते हुए बताया कि यह शिक्षा नीति बच्चों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है। नई शिक्षा नीति के अनुसार स्कूल्स में बच्चों को न सिर्फ शिक्षा प्रदान की जाएगी बल्कि उनकी काबिलियत को विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। एक सर्वे के अनुसार देश के लगभग 17 प्रतिशत बच्चे अपनी पढ़ाई माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर तथा 4 प्रतिशत बच्चे प्राइमरी लेवल पर पढाई छोड़ देते है । इस समस्या को ध्यान में रखते हुए स्किल बेस्ड शिक्षा को स्कूली शिक्षा में सम्मिलित किया गया है । नवीन शिक्षा नीति में विद्यालयीन शिक्षा के 4 लेवल होगे जिसमें फाउंडेशन इयर 5 साल तथा 3+3+4 वर्ष के तीन स्तर होगे ।

कक्षा 6 से ही छात्रों को तकनीकी शिक्षा देकर उन्हें हुनरमंद बनाया जायेगा । इन महती आवश्यकताओं को पूर्ण करने हेतु शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी इस शिक्षा नीति में जोर दिया गया है। अब प्रत्येक शिक्षक को नई तकनीक को सीखना आवश्यक होगा। इस नई शिक्षा नीति में शिक्षको के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। यह शिक्षा नीति देश के उज्जवल भविष्य का निर्माण करने में सक्षम है। कार्यक्रम के अन्त में कानपुर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के संयुक्त सचिव सरदार अमरप्रीत सिंह ने सभी अतिथियों को धन्यवाद देते हए आशा व्यक्त की कि नयी शिक्षा नीति बच्चों के भविष्य को उज्जवल तथा देश को समृद्ध व विकसित बनाएगी।

कार्यक्रम में कानपुर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री मनमोहन सिंह.. एडिशनल सेक्रेटरी युसूफ बेग, सुबोध कटियार, कोषाध्यक्ष हर्षप्रीत सिंह, श्री के० के० दुबे, पुनीत द्विवेदी, अजीत अग्रवाल, मयंक बाजपेड़, विवेक तिवारी, भव्या चौहान, करन चोपड़ा, नेशनल इंडिडेट टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक अवस्थी उपाध्यक्ष धीरज श्रीवास्तव, प्रशांत त्रिपाठी कोऑर्डिनेटर इमरान खान कोषाध्यक्ष विवेक मिश्रा, कोचिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष सतेन्द्र कटियार, योगेन्द्र सिंह, राजबहादुर सहित नगर के अनेक प्रतिष्ठित विद्यालयों के प्रबंधक, प्राचार्य, शिक्षाविद एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper