नए युवाओं की आबादी करीब 5 करोड़ लेकिन मतदाता बने सिर्फ डेढ़ करोड़

दिल्ली ब्यूरो: सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक आगामी चुनाव में पीएम मोदी के लक्ष्य को भारी झटका लग सकता है। सूचना के मुताबिक देश में जरवरी-2018 की स्थिति में 18-19 साल आयुवर्ग के महज 30 फ़ीसदी मतदाता ही पंजीकृत हो पाए हैं, जबकि उनकी आबादी 4.85 करोड़ के आसपास है। यही नहीं कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इस उम्र के मतदाताओं के पंजीकरण की दर और कम है। बता दें कि इन सभी राज्यों में इसी साल विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी की राजनीति को झटका लगेगा।

बता दें कि प्रधानमन्त्री मोदी लगातार युवा और छात्रों पर फोकस बनाये हुए हैं और उन्हें उम्मीद है कि जो नए युवा मतदाता बनेंगे, बीजेपी के साथ आएंगे। इसके लिए लगातार पीएम मोदी युवाओं और छात्रो के साथ संपर्क भी बनाये हुए हैं। लेकिन जिस तरह से युवा वर्ग मतदाता बनने से बंचित हो रहे हैं उससे लगता है कि मोदी के लक्ष्य पूरे नहीं होंगे। बता दें कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 2019 का लोक सभा चुनाव जीतने और सत्ता में वापसी के लिए युवा मतदाताओं को लक्ष्य बना रही है।

इन आंकड़ों के हिसाब से अगर मौज़ूदा मतदाता सूचियों के आधार पर ही चुनाव होते हैं तो 4.85 करोड़ युवा मतदाताओं (जो पहली बार वोट करेंगे) में लगभग 3.42 करोड़ मतदाता वोट नहीं डाल पाएंगे। यानी लगभग 70.51 फ़ीसदी के आसपास मतदाता वोट डालने से वंचित रहेंगे। क्योंकि उनके नाम मतदाता सूचियों में हैं ही नहीं। जो युवा इस साल 18 वर्ष के हुए हैं उनमे मात्र 29.49 प्रतिशत या 1.43 करोड़ मतदाता ही पंजीकृत हो पाए हैं।

चुनाव आयोग के अनुसार जनवरी 2018 की स्थिति में देश की अनुमानित आबादी 137.63 करोड़ के आसपास थी। इनमें से 87.75 करोड़ लोग वोट देने के पात्र हैं। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी इसकी पुष्टि करते हुए बताते हैं, ‘हम कई तरह के जागरूकता कार्यक्रमों के आदि के ज़रिए ज़्यादा से ज़्यादा मतदाताआें को पंजीकृत करने की कोशिश में हैं। अगले साल लोक सभा चुनाव के मद्देनज़र युवा मतदाताओं को लक्ष्य बनाकर ख़ास कार्यक्रम चला रहे हैं।’

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