नए साल में मुसीबतों से पाना चाहते हैं छुटकारा तो चन्द्र और मंगल देव को ऐसे करें प्रसन्न

मंगल ग्रह को बहुत ही तेजस्वी ग्रह माना जाता है। कहा जाता है कि अगर ये किसी व्यक्ति पर प्रसन्न हो जाएं तो उसका जीवन मंगलमय हो जाता है। इनकी पूजा करने से हनुमानजी भी प्रसन्न होते हैं। कई बार कुंडली में मंगल दोष होने की वजह से कष्ट उत्पन्न होने लगते हैं। ज्योतिष में मंगल एक क्रूर ग्रह है। मनुष्य जीवन के लिए यह बड़ा प्रभावकारी ग्रह है। मंगल दोष के कारण लोगों के विवाह में कठिनाई आती है। इसके हमारी जन्म कुंडली में स्थित सभी 12 भावों में इसका प्रभाव भिन्न होता है। उन प्रभावों को आप यहाँ विस्तृत रूप से जान सकते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल ग्रह को पृथ्वी का पुत्र कहा जाता है । ग्रहों में मंगल का महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है । हमारे शरीर में मंगल रक्त में निवास करता है । जो व्यक्ति खेलकूद जैसे कि कुश्ती, क्रिकेट, बाक्सिंग आदि के खिलाड़ी होते हैं वे मंगल के अधीन आते हैं । सेना में अधिकारी, पुलिस, सर्जन इत्यादि मंगल के अधीन होते हैं । मंगल के साथ शनि का संयोग व्यक्ति को डाक्टर बनाता है यदि मंगल अधिक बलवान हो तो वह सफल डाक्टर बनता है तथा उसका कार्य चीरफाड़ से सम्बंधित होता है। शनि अगर अधिक बलवान हो तो दोनों के संयोग से कारावास या जेल से सम्बंधित आजीविका होती है।

मंगल मकर राशि में उच्च के होते हैं और कर्क राशि में नीच के होते हैं। वहीं चन्द्रमा पीड़ित होने पर मन खराब होने के साथ-साथ आत्मविश्वास और साहस भी कमजोर होने लगता है। माना जाता है कि जिनकी कुंडली में चंद्रमा और मंगल कमजोर होते हैं, वे अक्सर कर्ज और मुकदमेबाजी में फंसे रहते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल शक्ति, ऊर्जा, आत्मविश्वास और पराक्रम का स्वामी है। मंगल को नवग्रहों में सेनापति का दर्जा दिया गया है। इसका मुख्य तत्व अग्नि है और इसका मुख्य रंग लाल है। ताम्बा इसकी धातु है और जौ, लाल, मसूर आदि इसके अनाज हैं। मंगल ग्रह की राशियां मेष और वृश्चिक हैं। मांगलिक दोष मनुष्य जीवन के दांपत्य जीवन को प्रभावित करता है। मंगल दोष व्यक्ति के विवाह में देरी अथवा अन्य प्रकार की रुकावटों का कारण होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में मंगल ग्रह प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में बैठा हो तो यह स्थिति कुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण करती है।

चन्द्रमा और मंगल देव को प्रसन्न करने के उपाय

मंगलवार को उपवास रखें और इस दिन नमक का सेवन न करें। इस दिन प्रातः और सायंकाल में हनुमान चालीसा का पाठ करें।

सोमवार के दिन एक लोटे में कच्चा दूध और पानी में काला तिल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। साथ ही इस दिन शाम के समय जरूरतमंद स्त्रियों को सफेद वस्तुओं का दान करें।

भारतीय वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को मुख्य तौर पर ताकत और मर्दानगी का कारक माना जाता है। मंगल प्रत्येक व्यक्ति में शारीरिक ताकत तथा मानसिक शक्ति एवम मजबूती का प्रतिनिधित्व करते हैं। मानसिक शक्ति का अभिप्राय यहां पर निर्णय लेने की क्षमता और उस निर्णय पर टिके रहने की क्षमता से है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल देव के मंत्र का जाप दोपहर में करने से मंगल का अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाता है।

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