नक्सलियों के मांद में घुसकर ललकार लगाती ये महिला कमांडो

रायपुर: देश का सबसे खतरनाक नक्सली बेल्ट छत्तीसगढ़ का सुकमा इन दिनों हमारी बहादुर बेटियों की धमक से मुस्कुरा रहा है। सुकमा की जनता चैन की सांस ले रही है और सड़क बनाते सरकारी अमले अपने को बेहद सुरक्षित पा रहे हैं। राज्य सरकार में महिला कमांडो की तैनाती सुकमा में की है ताकि नक्सली हमले से सड़क को बचाया जा सके और ग्रामीण महिलाओं को नक्सल आंदोलन में जाने से रोका जा सके। अब इन्ही महिला कमांडो पर सुकमा जैसे खतरनाक इलाके की सड़को का जिम्मा है। माना जा रहा है कि नक्सली हमलो से अब यहां की सड़के सुरक्षित हो गयी है।

आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ का सुकमा बस्तर संभाग का जिला है जो पूरी तरह से नक्सलियों की चपेट में है। पहाड़ी और जंगली यह इलाका इतना खतरनाक माना जाता है कि यहां से दिन में भी गुजरना मौत के साथ खेलने जैसा है। चुकी सरकार इस इलाके में विकास योजनाए चला रही हैं और बड़े स्तर पर सड़कों का निर्माण कर रही है इसलिए नक्सली सरकारी अमले और सड़क बनाए वाले मजदूरों पर हिंसक हमला करने से बाज नहीं आते। अब नक्सलियों के हमले को रोकने के लिए और बन रही सड़क की पूरी हिफाजत के लिए राज्य सरकार ने प्रशिक्षित महिला कमांडो को वहाँ भेजा है।

पहली खेप में 60 प्रशिक्षित महिला कमांडो को तैनात किया गया है। इन महिला कमांडो में अधिकतर वही महिलाये है जो पहले नक्सली गतिविधियों में लड़ाका का काम करती थी। सरेंडर के बाद इन महिलाओं को बेहद सख्त ट्रेनिंग देकर आधुनिक हथियारों के साथ नक्सल इलाके की जिम्मेदारी दी गयी है। इसके साथ ही इन महिला कोमंडोस में सामान्य रूप से चयनित महिलाये भी है जो पुलिस सेवा के जरिये नक्सली गतिविधियों को रोकने के लिए कोमंडोस बानी है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ स्थित सुकमा जिले में दोरनापाल से जगरगुंडा तक सड़क बनाई जा रही है। लेकिन यहां सड़क बनाना बारूद के ढेर पर सड़क बनाने जैसा है। यहां आए दिन नक्सल हमले होते हैं और गोलियां चलती हैं। अब नक्सलियों से लोहा लेने के लिए उसे मैदान में उतारा गया है। एंटी नक्सल ऑपरेशन के स्पेशल डीजी डीएम अवस्थी ने कहा कि ये महिला कमांडो काफी बहादुर है। इन्हें कड़ी ट्रेनिंग दी गई है। उन्होंने कहा कि महिला कमांडो नक्सलियों के सुरक्षाबलों पर लगाए जाने वाले रेप के झूठे आरोपों से भी बेहतर ढंग से निपट सकेंगी।

सुकमा जिले के पोलमपल्ली में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है। गांव से करीब दो किलोमीटर दूर सड़क बनाई जा रही है। जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सुरक्षा बल संभाल रहे थे लेकिन एक सप्ताह पहले महिला कंमाडो को यहां की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। करीब 60 महिलाओं की छोटी बटालियन को पोलमपल्ली कैंप भेजा गया है। ये महिलाएं सड़क सुरक्षा के लिए हर दिन हथियार से लैस होकर निकलती है और शाम को वापस कैंप लौटती हैं। वर्तमान में ये महिला कमांडो पुरुष कमांडो के साथ सड़क और थाने की सुरक्षा संभाल रही हैं।

महिला कमांडो कहती हैं कि ‘हर चुनौती का सामना करने के लिए हम तैयार हैं। क्योंकि नक्सलियों के पास भी हथियार है और हमारे पास भी लेकिन हमारे पास देश के लिए मर मिटने का जो जज्बा है वो नक्सलियों में नहीं है। जिले के विकास में हम भागीदारी निभा रहे हैं उससे हमें काफी खुशी है। हम हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।

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