नजर लागी जेटली तेरे सूटकेस पर…

अखिलेश अखिल


लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो: बजट बनकर तैयार है गुरुवार को संसद में इसे पेश कर दिया जाएगा। 2018 -19 के इस बजट पर आम लोगों की निगाहें टिकी हुयी है। नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक की मार झेल चुके लोगों की चाहत है कि मोदी सरकार इस बजट में कुछ नया करंगे ताकि लोगों को राहत मिल सके। लोगों को यह भी उम्मीद है कि चुकी अब लगातार चुनाव होने वाले हैं इसलिए सरकार कुछ रिआयत दे सकती है। बजट पर सबसे ज्यादा निगाहें युवाओं और किसानो की लगी है। युवा मानकर चल रहे हैं कि रोजगार के मामले अबतक फिसड्डी रही सरकार काम से काम इस बजट में युवाओं के लिए खास काम करेगी ताकि सरकार का इकबाल बुलंद रह सके।

वित्त मंत्री अरुण जेटली गुरुवार को देश का बजट पेश करेगें। जब भी देश का बजट पेश होने की बात होती है तो सभी के जहन में वित्त मंत्री का सूटकेस थामे हुए चेहरा सामने आ जाता है। क्या आप जानते हैं कि वित्त मंत्री तो बजट पेश करने वाला चेहरा होता है पर उनके साथ-साथ बजट बनाने में बहुत से लोगों की मेहनत भी छिपी होती है। आइए जानते हैं कि इस बार के बजट बनाने की कोर टीम में अरुण जेटली के साथ और कौन-कौन शामिल है।

-अरविंद सुब्रह्मणयन, मुख्य आर्थिक सलाहकार

अरविंद सुब्रह्मणयन भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं। वह लंबे समय से कृषि अर्थव्यवस्था में सुधार और राजकोषीय घाटे को आर्थिक नीतियों के जरिए काबू करने पर काम कर रहे हैं। गरीबी कम करने के लिए ‘यूनिवर्सल बेसिक इनकम’ का सुझाव भी इन्हीं का है।

हंसमुख अधिया

हंसमुख अधिया वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी हैं। इस साल पेश होने वाले बजट की टीम की अगुवाई इन्हीं के हाथों में है। देश में अहम कर सुधार जीएसटी लागू कराने में इन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। नोटबंदी लागू होने के बाद कालेधन पर लगाम कसने के सुझावों में भी इनकी भूमिका रही है। वह 1981 के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी व वर्तमान में वित्त सचिव व सचिव राजस्व विभाग हैं।

सुभाषचंद्र गर्ग
सुभाषचंद्र गर्ग आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव हैं। इन पर विकास, निजी निवेश और रोजगार बढ़ाने से जुड़ी नीतियों का जिम्मेदारी है। वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों का सचिव बनने से पहले ये विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक भी रह चुके हैं।

नीरज कुमार गुप्ता

नीरज कुमार गुप्ता निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव हैं। इनके नेतृत्वब में सरकार ने विनिवेश लक्ष्य प्राप्त किया। इस साल के बजट में सरकार जो बडे़ फैसले लेगी उस खर्च की डोर इन्हीं के हाथ में है। इनका काम सरकार के बडे़ खर्चों के लिए वित्तीय इंतजाम करना है। ये 1981 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

अजय नारायण झा
पहले अजय नारायण झा वित्त आयोग के सचिव थे अभी वह व्यय विभाग के सचिव हैं। कहा जा रहा है कि अगले साल के चुनावों के सरकार जमकर खर्च कर सकती है। ऐसे में खर्च और आमदनी के बीच का गणित सुलझाने की जिम्मेदारी इन्हीं की है। झा 1982 बैच के मणिपुर कैडर के आईएएस अधिकारी हैं।

राजीव कुमार
राजीव कुमार वित्त सेवा विभाग के सचिव हैं। इस बजट में इनका अहम काम लघु उद्योगों और मध्यम वर्ग के कारोबारियों को आसानी से ऋण दिलाने का होगा। बैंकों, बीमा और पेंशन को लेकर सुधार का भी जिम्मा होगा। वह 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं।

इसके अलावे भी दर्जन भर से ज्यादा एक्सपर्ट काम करते हैं। साथ ही हर विभाग से जुड़े लोग भी इसमें हाथ बटाते हैं। बजट बनाने से पहले समाज के हर तपको से सरकार के लोग विचार करते हैं और उनकी मांगों को सुनते हैं। अब देखना होगा कि 2018 का यह बजट आम जनता को क्या कुछ देती है और भारत की कैसी तस्वीर पेश करती है।

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