नरोदा पाटिया हत्याकांड: मुख्य आरोपी माया कोडनानी बरी

दिल्ली ब्यूरो: गुजरात के नरोदा पाटिया हत्याकांड मामले की मुख्य आरोपी माया कोडनानी को बरी कर दिया गया है। गुजरात हाई कोर्ट ने इस तरह का फैसला लिया है। बता दें कि गुजरात का नरोदा पाटिया हत्याकांड 2002 में घटित हुआ था जिसमे 11 लोग मार दिए गए थे। इसी मामले में दूसरे आरोपी बाबू बजरंगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस मया कोडनानी को आज बरी किया गया है उसे स्पेशल कोर्ट ने साल 2012 में 28 साल की सजा सुनाई थी। इस मामले में कुल 32 लोग दोषी पाए गए थे जिनमे से कोडनानी समेत 17 लोगों को बरी किया गया है। इस मामले में एक आरोपी की मौत हो चुकी है।

आपको बता दें कि माया कोडनानी राज्य की तत्कालीन नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। नरोदा पाटिया हत्याकांड मामले में उनपर एक भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप था। माया बेन कोडनानी के कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्पेशल एसआईटी कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह उनके साथ खड़े नजर आए। माया कोडनानी के पक्ष में दलीलें देते हुए अमित शाह ने उस वक्त कोर्ट में कहा था, ”28 फऱवरी 2002 को सुबह 8.30 बजे विधानसभा का सत्र था। दंगों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने का प्रस्ताव रखा गया था। कुछ देर बाद सदन स्थगित किया गया था। मायाबेन कोडनानी उस वक्त विधानसभा में मौजूद थीं। ”

बता दें कि माया कोडनानी 2002 में बीजेपी की विधायक थीं। वह तीन बार विधायक रह चुकी हैं और बाद में गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री बनीं। 2002 के नरोदा पाटिया केस में मुख्या आरोपी रहीं जिन्हें आज हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। माया कोडनानी के पिता संघ के कार्यकर्ता थे जो बंटवारे के वक्त पाकिस्तान छोड़कर भारत आए थे। कोडनानी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने पिता के ही बनासकांठा स्थित गुजराती मिडियम स्कूल से की। इस दौरान वह संघ की महिला शाखा राष्ट्रीय सेविका समिति का हिस्सा बनीं.इसके बाद माया कोडनानी ने उच्च शिक्षा की ओर रुख किया और बड़ोदरा आ गईं। यहां उन्होंने बड़ोदरा मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई की थी।

90 के दशक में माया बेन कोडनानी ने राजनीति की ओर रुख किया। अपने राजनितिक करियर का पहला चुनाव माया बेन ने साल 1995 में अहमदाबाद नगर निगम के लिए लड़ा। इसके बाद वह नरोदा विधानसभा वह तीन बार विधायक रह चुकी हैं और बाद में गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री बनीं। साल 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए एसआईटी (स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम) का गठन किया। साल 2009 में गिरफ्तारी के बाद माया बेन के पद से इस्तीफा देना पड़ा। 21 अगस्त 2012 को आए फैसले में माया बेन कोडनानी को दोषी करार देते हुए कोर्ट ने 28 साल के कारावास की सजा सुनाई थी।

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