नवरात्र में ‘भूत’ खलल न डालें, इसलिए पुलिस ने किया पाबंद!

हमीरपुर: उत्तर प्रदेश में अजब पुलिस की गजब कहानी उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब हमीरपुर जिले की पुलिस ने नवरात्र में खलल डालने की आशंका में उप जिलामजिस्ट्रेट सदर के न्यायालय में ‘भूतों’ को भी पाबंद करने की चालानी रिपोर्ट पेश कर दी। फजीहत होने पर अब अपर पुलिस अधीक्षक ने सीओ को जांच सौंपी है।

मामला हमीरपुर नगर पुलिस से जुड़ा है। नगर कोतवाल शैल कुमार सिंह ने चार अक्टूबर को नवरात्र में शांति भंग की आशंका के मद्देनजर सीआरपीसी की धारा-107/116 के तहत कुल 31 लोगों को चिन्हित कर उप जिला मजिस्ट्रेट सदर की अदालत में चालानी रिपोर्ट पेश कर पाबंद किए जाने का अनुरोध किया है। इन 31 लोगों की सूची के क्रमांक-1 नीशू द्विवेदी पुत्र प्रेम नारायण, क्रमांक-8 नन्हे अवस्थी पुत्र देवी शरण और क्रमांक-30 में दर्ज कल्लू पुत्र नामवेद की पिछले साल मौत हो चुकी है। अदालत ने इस चालानी रिपोर्ट पर वाद संख्या-2266 पंजीकृत कर छह अक्टूबर को बिना परीक्षण किए सीआरपीसी की धारा-111 के तहत पाबंद करने का आदेश निर्गत कर सभी को दस अक्टूबर को तलब भी कर लिया। पुलिस को पसीना तब छूटा, जब तीन भूतों को नोटिस नहीं तामील करवा पायी और उनके परिजनों ने पुलिस को उनकी मौत हो जाने की जानकारी दी।

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नगर कोतवाल ने अपनी चार अक्टूबर की चालानी रिपोर्ट लिखा कि ‘सर्वोच्च न्यायालय ने 2014 में नदियों में मां दुर्गा की मुर्ति विसर्जन पर पाबंदी लगा दी थी, इसके बावजूद 2014 में नीशू आदि उल्लिखित 31 लोगों ने जबरन यमुना नदी में मूर्ति विसर्जित करने की कोशिश के दौरान बलवा कर प्रशासन पर पत्थरबाजी की, जिससे उन्हें मुकदमा अपराध संख्या-1630/14, धारा-147, 149, 325, 353, 336, 353ए, 504, 506 व 427 और 7 क्रिमिनल लाॅ एक्ट के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था और आज भी यह मुकदमा विचाराधीन है।’ उन्होंने लिखा कि ‘आगामी दुर्गा पूजा में इनके द्वारा पुनः कोई विवाद उत्पन्न कर परिशांति विक्षुण्य किए जाने की प्रबल संभावना है। परिशांति विक्षुण्य होने से रोंकने के लिए इनका इस अवधि में स्वतंत्र रहना कानून व्यवस्था बनाए रखने के हित में नहीं है।’

‘भूतों’ का चालान पेश किए जाने का मामला जैसे ही उजागर हुआ, पुलिस अधिकारियों के कान खड़े हो गए। अपर पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने शुक्रवार को कहा कि ‘नगर पुलिस ने भौतिक सत्यापन नहीं किया और पुराने मामले को ही ताजा दिखाते हुए चालानी रिपोर्ट प्रेषित कर कर दी है, यह बहुत बड़ी गड़बड़ी है। इस मामले की जांच सीओ से कराई जा रही है, जांच रिपोर्ट मिलते ही दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’ लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली ‘टेबिल ड्राफिंग’ में बदल गई है? जो घर बैठे ही कानून व्यवस्था दुरुस्त करने में जुटी है। अब देखना यह होगा कि ‘भूतों’ का चालान करने वाले कोतवाल के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या दुर्गा मूर्ति विसर्जन के साथ ही जांच भी विसर्जित हो जाएगी।

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