नहीं चाहिए तारीख पे तारीख

प्रकाश भटनागर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 7 जून को 9वीं बार अयोध्या पहुंचकर अयोध्या शोध संस्थान में 7 फीट ऊंची भगवान राम के कोदंड स्वरूप की आदमकद प्रतिमा का अनवारण किया। योगी ने राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के 81वें जन्मदिवस समारोह का उद्घाटन भी किया। लोकसभा चुनाव के खत्म होने के बाद योगी का यह पहला अयोध्या दौरा है। इससे पहले योगी ने चुनाव के दौरान आयोग द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद हनुमानगढ़ी के दर्शन किए थे। योगी के अयोध्या दौरे के बाद राजनीतिक हलकों में राममंदिर का मुद्दा फिर गरमा गया है।

लोकसभा चुनाव के दौरान अभिनेता सनी देओल से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया था- हिंदुस्तान जिंदाबाद था, है और रहेगा। यह सनी की मशहूर फिल्म ‘गदर’ का चॢचत संवाद था। गदर वाला अंदाज तो खैर मोदी ने वास्तविक जिंदगी में दिखा दिया है। लोकसभा चुनाव में धमाकेदार जीत हासिल कर के। लेकिन अब उनके लिए सनी के एक और संवाद पर बारीकी से गौर करने का समय आ गया है। अभिनेता ने फिल्म ‘दामिनी’ में अदालती प्रक्रिया में बेवजह के विलंब पर सवाल उठाया था। कहा था, तारीख पे तारीख! तारीख पे तारीख!! तो मोदी भी जान लें कि दूसरी और पहले से अधिक मजबूत स्थिति में मिली इस सियासी पारी में उनके लिए भी जनता की ओर से खीझ भरे स्वर में, तारीख पे तारीख! तारीख पे तारीख!! वाले स्वर उठने की आशंका बेहद प्रबल हो गई है। नई सरकार के आकार लेने से पहले ही संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर के निर्माण के प्रति अपनी तीव्र इच्छा जाहिर कर दी है। भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रवींंद्र रैना ने कहा है कि उनकी पार्टी कश्मीर से अनुच्छेद 370 तथा 35ए हटाने के लिए प्रतिबद्ध है।

यानी भाजपा की मातृ संस्था जैसा विराट स्तर और एक प्रदेश के अध्यक्ष जैसे बेहद छोटे स्तर, दोनों ही जगह से पार्टी को यह याद दिलाया जाने लगा है कि जिन अहम वादों की बदौलत उसने वर्ष 2014 में सफलता पाई थी, उन वादों पर अमल इस कार्यकाल की बड़ी अनिवार्यता बन चुका है। नि:संदेह मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश सबको स्वीकार करना चाहिए। लेकिन कोर्ट की आड़ में इस मामले को और टालना क्या ठीक है? खुद अदालत ने इस बात को तवज्जो दी है कि यह मामला चर्चा से सुलझा लेना बेहतर होगा। मध्यस्थता कमेटी काम कर ही रही है। मोदी और कुछ न करें, तो भी कम से कम चर्चा का माहौल तो तैयार कर ही सकते हैं। इससे साफ संदेश जाएगा कि इस कार्यकाल में यह सरकार मध्यस्थता समिति के साथ कदमताल कर रही है। अनुच्छेद 370 तथा 35ए का भी यही हाल है। इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को कश्मीर में 46 फीसदी वोट मिले। यह पार्टी के इतिहास में इस प्रदेश से सबसे बड़ा योगदान है। इस दल को राज्य के 27 विधानसभा क्षेत्रों में खासी बढ़त मिली है। जाहिर है कि वोटर का यह प्रेम इन अनुच्छेदों के प्रति भाजपा के रुख का समर्थन कर रहा है।

इस चुनाव नतीजे के लिए मतदाता के धैर्य की थोड़ी और समझदारी की बहुत ज्यादा प्रशंसा करनी होगी, क्योंकि उसने मोदी के खिलाफ सतत रूप से पांच साल तक प्रोपेगेंडा चलाने वालों की बात पर ध्यान नहीं दिया। काला धन आने की सूरत में हर भारतीय के खाते में पंद्रह लाख रुपए जमा होने की बात कतई आश्वासन नहीं थी। लेकिन इसे झूठा आश्वासन बता-बताकर मोदी को लगातार निशाना बनाया गया। मोदी ने जिस तरह के सपने दिखाए थे, वह पांच साल में नहीं बन सकते, ङ्क्षकतु विरोधियों ने यह मामले भी यूं उठाए, गोया कि इनके लिए पांच साल की समयसीमा तय हो। यह भी सही रहा कि पहले कार्यकाल में मोदी कई मामलों में अपने कहे पर अमल नहीं कर सके। ङ्क्षकतु मतदाता बहकावे में नहीं आया। उसने इस बात को समझा कि हालात को बदलना और खासकर से गैर-कांग्रेसी तरीके जैसा परिवॢतत करना कम से कम पांच साल की मियाद वाली बात नहीं है। इसलिए उसने दोबारा, पहले से भी अधिक वोट देकर इस सरकार में भरोसा कायम रखा है। लिहाजा इस सरकार को अब अपने हर आचरण में यह दिखाना होगा कि अब बचे वादों के पूरा होने का समय है।

पहले कार्यकाल में दो सॢजकल स्ट्राइक करने वाले मोदी के लिए इस दिशा में चुनौती बढ़ गई है। अब तो उन्हें वह माहौल तैयार करना होगा कि सॢजकल स्ट्राइक की नौबत ही नहीं आए। यूं तो अपने पहले पांच साल में ही मोदी इस दिशा में काफी आगे निकल चुके हैं, लेकिन बीते सात दशक में इस पड़ोसी से त्रस्त देश की आवाम उसका जो हश्र देखना चाहती है, उसके लिए मोदी जैसी दमदारी और भी वृहद स्तर पर सामने आने की सख्त जरूरत है। बेरोजगारी इस सरकार के लिए बड़ा मुद्दा है। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि सन 2014 से 2019 तक खाली हाथ वालों की तादाद तेजी से बढ़ी है। लिहाजा अब सन 2024 तक उस माहौल की दरकार है, जिसमें मोदी के मेक इन इंडिया का स्वरूप रोजगार के जरिए सामने आए। इस सरकार से बेरोजगारों को इसकी पूरी उम्मीद है। वरना और कोई वजह नहीं रह जाती कि देश का युवा आजीविका के तौर पर पकौड़े तलने वाले विकल्प को भी मोदी की क्षमताओं के रूप में मानकर अंगीकार कर लेता।

अंतिम बहुत महत्वपूर्ण बात यह कि नई सरकार को ध्यान रखना होगा कि विदेशों में जमा काला धन देश में लाने का वादा मोदी ने किया था और इस दिशा में अब तक बहुत खास पहल नहीं होती दिखी है। सनी देओल ने तारीख पे तारीख! तारीख पे तारीख!! वाला नागवारी से भरा संवाद दामिनी फिल्म में कहा था। दामिनी का अर्थ आकाशीय बिजली होता है। वर्ष 2014 से लेकर अब तक मोदी पर तारीख पे तारीख! तारीख पे तारीख!! वाला दबाव बना रहे विपक्ष के ऊपर खुद जनता ने ही बिजली गिरा दी है। लेकिन अब वह भी बहुत अधिक इंतजार नहीं करेगी। मुरव्वत भी नहीं। इसलिए हरेक अधूरे वादे की दिशा में तेजी से काम शुरू करना मोदी सरकार के लिए बहुत जरूरी हो गया है।

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