नागिन का ऐसा बदला 21 वीं सदी में पहली बार देखने को मिला!

लखनऊ: नागिन का ऐसा बदला 21 वीं सदी में शायद ही कहीं देखने को मिले. नागिन ने एक-दो नहीं बल्कि एक-एक करके 26 लोगों को डस लिया. यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि हकीकत है. उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में नागिन के बदले की हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. ग्रामीण के मुताबिक नाग पंचमी के दिन नाग को मारे जाने से गुस्साई नागिन अब इलाके के लोगों को चुन- चुन कर डस रही है.

मामला उत्तर प्रदेश के बहराइच के रुपईडीहा थाने के बाबागंज इलाके का है. यहां इन दिनों बारिश के कारण खेतों में पानी भर जाने से जहरीले सांप निकल रहे हैं. शंकरपुर, चिलबिला, बेलभरिया सहित कुछ गांव में दो दर्जन से ज्यादा ग्रामीण सहित आधा दर्जन पशुओं को सांप ने डस लिया है . शंकरपुर में जानवरों को चारा लगाने जा रहे इबरार को नागपंचमी के दिन सांप ने काटने को दौड़ाया. वे भाग कर किसी तरह अपनी जान बचाए. इस बीच किसी ने जहरीले सांप को मार डाला.

इस घटना के बाद दो दिन में संदीप, गुलाबी देवी, शीला देवी, माया देवी, झल्ले, नेहा, धर्म प्रकाश, विपिन, चिरकू, भागीरथ की पत्नी, नगरिया, बैधे, पवन समेत 26 ग्रामीणों को नागिन ने डस लिया है . इसमें एक ग्रामीण मुंशी राम की मौत हो गई है. ग्रामीणों का कहना है कि नाग पंचमी के दिन गांव के मंदिर में रह रहे नाग के जोड़े में से नाग को ग्रामीणों ने मार डाला था. तब से गुस्साई नागिन गांव में आतंक मचा रही है. सांप के डंक में जकड़े ग्रामीणों ने तो गांव छोड़ना भी शुरू कर दिया है.

स्थानीय लोग भी सांप को पकड़ने के लिए सपेरों को बुला रहे हैं .लेकिन सपेरा शरीफा का कहना है कि ,’यह बारिश का मौसम है और बड़ी संख्या में सांप हैं . हम उन सभी को नहीं पकड़ सकते है’. वहीं , ग्रामीण पप्पू ने बताया कि यह विशेष महिला सर्प हमारे गांव के निवासियों को निशाना बना रही है .

पीड़ितों ने बताया कि सोते समय उन्हें सर्प दंश का अहसास होता है, लेकिन उन्हें नागिन दिखाई भी नहीं देती है. यहाँ तक कि झाड़-फूंक करने वाले भी गांव में जाने से कतरा रहे हैं. गांव में दहशत का माहौल है, लोग अपने बच्चों को रिश्तेदारी में भेज रहे हैं.

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper