निरंजनी अखाड़े के महंत ने गोली मार की आत्महत्या

प्रयागराज। दारागंज में गंगा किनारे स्थित पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के महंत आशीष गिरि ने लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। सूचना पर डीआईजी कवींद्र प्रताप सिंह और एसपी सिटी बृजेश कुमार श्रीवास्तव के अलावा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि भी पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने मौका मुआयना किया और फारेंसिक एक्सपर्ट से भी जांच करायी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक महंत आशीष गिरि बीमार रहते थे, शायद इसी कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। महंत आशीष गिरि मूलत: उत्तराखंड के थे।

बचपन में ही संन्यास ग्रहण कर लिया था। पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी अखाड़े का भवन दारागंज में गंगा तट के करीब है। यहीं अखाड़े में 41 वर्षीय महंत आशीष गिरि रहते थे। बताया गया कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी ने रविवार को सुबह 8 बजे आशीष गिरि से फोन पर बात की थी और उन्हें नाश्ता के लिए बाघम्बरी मठ में बुलाया था। उस वक्त महंत आशीष गिरि ने कहा कि वह स्नान करने जा रहे हैं, स्नान के बाद पहुंचेंगे। जब वह नहीं पहुंचे तब मठ में रहने वाले कुछ शिष्य अखाड़ा भवन पहुंचे। दूसरी मंजिल पर उनके कमरे का दरवाजा खुला था।

बिस्तर पर खून से लथपथ आशीष गिरि पड़े थे। उनके हाथ की अधखुली हथेली में पिस्टल फंसी थी। कनपटी पर गोली लगी थी। सूचना मिलते ही डीआईजी कवींद्र प्रताप सिंह और एसपी सिटी बृजेश कुमार श्रीवास्तव मौके पर पहुंच गये। बताया गया कि आशीष गिरि हाई ब्लड प्रेशर और पेट की बीमारी से परेशान थे। उनका लिवर भी खराब हो गया था।

इससे वह परेशान रहने के साथ तनाव में भी रहते थे। पुलिस अधिकारियों ने आश्रम के लोगों से पूछताछ की। उन्हें भी बताया गया कि महंत आशीष गिरि बीमारी से परेशान रहते थे और शायद इसी कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव का पोस्टमार्टम कराया।

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