निशीथ राय को कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया इंकार

लखनऊ: हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने डॉ शंकुतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विविद्यालय के कुलपति रहे डॉ निशीथ रॉय को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है । विश्वविद्यालय की सामान्य परिषद द्वारा रॉय के खिलाफ जाँच कराए जाने तथा इनके काम पर रोक लगाए जाने के आदेश पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने निशीथ रॉय की अंतरिम अर्जी खारिज करते हुए कोई राहत नही दी । यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बाबा साहब भोसले व न्यायमूर्ति विवेक चौधरी की खंडपीठ ने डॉ निशीथ रॉय की ओर से दायर याचिका पर दिये हैं ।

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अदालत ने विपक्षीगणों से कहा कि वह 2 सप्ताह में प्रतिशपथ पत्र पेश कर सकते है और याची इसका प्रतिउतर शपथपत्र दे सकता है।याचिका दायर कर विविद्यालय की सामान्य परिषद द्वारा डॉ निशीथ रॉय के खिलाफ जाँच बैठाए जाने व इनके काम पर रोक लगाए जाने वाले 17 फरवरी के आदेश को चुनौती दी गई हैं । याची की ओर से माँग की गई है कि उसे अंतरिम राहत देते हुए इस आदेश पर रोक लगाई जाए । अदालत ने सुनवाई के बाद फिलहाल कोई राहत नही दी है। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह ने याचिका का कड़ा विरोध किया। महाधिवक्ता ने बताया कि सामान्य परिषद का आदेश कानूनन ठीक है । लिहाजा याची राय को कोई राहत न दी जाय ।

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विदित हो कि डॉ शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विविद्यालय के कुलपति डॉ निशीथ रॉय के खिलाफ कई गम्भीर आरोप प्रकाश में आये थे जिनके खिलाफ डॉ रॉय ने पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी । इस याचिका को अदालत ने निपटारा करते हुए कहा था कि विविद्यालय की सामान्य परिषद (जनरल बॉडी ) फिर से निर्णय ले सकती हैं । हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले में विविद्यालय की सामान्य परिषद ने गत 17 फरवरी को निर्णय लिया था जिसके तहत प्रारंभिक जांच में डॉ निशीथ रॉय के खिलाफ अनेक आरोप उजागर हुए थे । परिषद द्वारा आरोपो की जाँच का निर्णय लिया गया ।

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मामले की जांच करने के लिए शैलेन्द्र सक्सेना को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है । साथ ही डॉ निशीथ रॉय के काम करने पर शासन ने रोक लगा कर इनकी जगह प्रवीर कुमार को कार्यभार दिया है । याचिका का कड़ा विरोध करते हुए महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह ने अदालत को बताया कि विविद्यालय की सामान्य परिषद का निर्णय विधिसम्मत व जायज है ।कहा कि याची अंतरिम राहत पाने का हकदार नहीं है । हालांकि इस मामले में अदालत ने दोनों पक्षो से अपने अपने पक्ष प्रस्तुत करने का मौका दिया है ।

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