नोएडा में गर्भवती महिला की मौत का मामला, सरकारी से लेकर निजी अस्पताल के कर्मचारियों पर गिरी गाज

नोएडा. उत्तर प्रदेश के नोएडा में इलाज न मिलने की वजह से शनिवार को 30 साल की गर्भवती महिला की मौत हो गई थी। महिला का पति उसके इलाज के लिए 13 घंटे तक सड़कों पर भटकता रहा लेकिन कोरोना के डर से किसी ने उसे भर्ती नहीं किया। अब इस मामले में जांच समिति ने 72 घंटे में अपनी रिपोर्ट दी है। इसके आधार पर नोएडा के जिलाधिकारी ने जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक समेत ईएसआई व निजी अस्पताल के कर्मचारियों पर कार्यवाही करते हुए शासन को पत्र लिखा है।

दरअसल, खोड़ा निवासी नीलम की मौत समय पर इलाज नहीं मिलने से हुई थी। वह आठ माह की गर्भवती थीं। उसके साथ बच्चे ने भी दम तोड़ दिया था। जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) व मुख्य चिकित्साधिकारी को इसकी जांच सौंपी थी। 72 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को पेश की गई। जांच में पाया गया है कि सेक्टर-24 ईएसआई अस्पताल नोएडा में सारी सुविधाएं व वेंटीलेटर की उपलब्धता के बावजूद पीड़िता का इलाज न करते हुए उसे जिम्स रेफर कर दिया गया।

एंबुलेंस के जरिए पीड़िता को जिम्स न ले जाकर सेक्टर-30 जिला अस्पताल के बाहर छोड़ दिया गया। साथ ही जिला अस्पताल के किसी भी कर्मचारी या अधिकारी से मरीज को रिसीव नहीं कराया गया। जांच में अस्पताल के निदेशक, उपचार व रैफर करने वाले चिकित्सक, एंबुलेंस के चालक को उत्तरदायी माना गया। जिलाधिकारी की ओर से इन कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए प्रमुख सचिव, श्रम उप्र शासन, सचिव, श्रम विभाग भारत सरकार नई दिल्ली व डीजी राजकीय कर्मचारी को पत्र लिखा है।

जिला अस्पताल के सीएमएस का किया जाए स्थानांतरण
जांच में पाया गया कि मरीज का इलाज यदि जिला अस्पताल में संभव नहीं है, तो उसे हायर सेंटर में रैफर किया जाना चाहिए था। यह निर्णय भी संविदाकार के जरिए नहीं बल्कि सक्षम अधिकारी की मौजूदगी में होना चाहिए। जांच में पाया गया कि उक्त कर्मचारियों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को बिना बताए मरीज को वापस कर दिया गया। इस तरह की सूचना बार बार सामने आ रही है। ऐसे में जिला अस्पताल में कार्यरत स्टॉफ नर्स रोजबाला, वॉर्ड आया अनीता के खिलाफ कार्यवाही करने व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक वंदना शर्मा को ट्रांसफर करते हुए मुख्य चिकित्सका अधीक्षक के पद पर किसी योग्य चिकित्सा अधीक्षक की तैयाती के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया।

निजी अस्पतालों को जारी किया कारण बताओं नोटिस
इस प्रकरण में निजी अस्पतालों की ओर से बेड नहीं होने का बहाना बनाया गया। इस संबंधित में जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सका अधिकारी को प्रकरण में लिप्त सभी निजी अस्पतालों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में एक चिकित्सीय समिति गठित एफआईआर दर्ज की जाए।

दो बार पहुंचे जिम्स नहीं मिला इलाज
इस प्रकरण में पीड़िता को लेकर परिजन दो बार जिम्स अस्पताल लेकर गए। पहली बार में अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा मरीज को वापस कर दिया गया। दूसरी बार भर्ती किया गया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। ऐसे में प्रथम बार में मरीज को वापस करने में लिप्त सभी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के लिए निदेशक जिम्स को जिलाधिकारी की ओर से निर्देशित किया गया है। वहीं, गाजियाबाद जिले के निजी चिकित्सालय की ओर से लापरवाही बरती गई। ऐसे में जिलाधिकारी गाजियाबाद को पत्र लिखकर अवगत करा दिया गया है।

नोएडा के डीमए सुहास एलवाई ने कहा कि सभी निजी व सरकारी अस्पताल यह सुनिश्चित करेंगे कि आपातकालीन परिस्थति में किसी भी मरीज को इलाज किए बिना अथवा भर्ती किए बिना वापस नहीं किया जाए। कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए इसकी व्यवस्था की जाएगी साथ ही इस संबंध में जिम्स के निदेशक से समस्त चिकित्सलायों को अलग-अलग प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा।

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