नोटबंदी और राफेल विवाद: सीएजी की चुप्पी पर देश के 60 पूर्व नौकरशाहों ने उठाये सवाल

दिल्ली ब्यूरो: देश के 60 से ज्यादा पूर्व नौकरशाहों और राजदूतों ने नोटबंदी और राफेल मामले में सीएजी की चुप्पी पर सवाल उठाये हैं और इस बावत सीएजी के नाम पत्र भी लिखा है।अपने पत्र में पूर्व नौकरशाहों ने ऑडिट रिपोर्ट में देरी को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। इस मामले में अपनी चिंता रखते हुए पूर्व नौकरशाहों ने पत्र में लिखा है कि समाज में ये महसूस किया जा रहा है कि सीएजी जानबूझ कर नोटबंदी और राफेल सौदे पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट साल 2019 के आम चुनावों तक टालने की कोशिश कर रही है ताकि मौजूदा सरकार को परेशानी से बचाया जा सके।

इस खुले खत पर हस्ताक्षर करने वाले सिविल सोसाइटी के कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने साल 2017 में एक गैर राजनीतिक प्लेटफार्म इसलिए बनाया था कि वो देश के अहम मुद्दों पर अपने विचार रख सकें। सीएजी ने पिछली यूपीए सरकार के दौरान कोयला खदान आवंटन, आदर्श सोसाइटी और कॉमनवेल्थ खेल जैसे कई मामलों पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट पेश की थी, जिसके बाद यूपीए सरकार के खिलाफ देश में एक माहौल बना था।

इस खुले खत में नौकरशाहों ने कहा है कि सीएजी के जरिया नोटबंदी और राफेल सौदे पर ऑडिट रिपोर्ट ना पेश करना, मौजूदा सरकार के पक्ष में काम करने जैसा कहा जा सकता है, जो इस प्रमुख संस्थान की साख के लिए एक नुकसानदेह होगा। देश में इनको लेकर तरह-तरह की बातों और दावों की वजह से देश की जनता सच्चाई से बेखबर है, जो एक गंभीर मामला है। सीएजी रिपोर्ट के जरिये लोगों को समय पर जानकारी हासिल होना उनका बुनियादी अधिकार है ताकि इन जानकारियों के आधार पर 2019 के आम चुनावों में वे अपनी राय का इजहार कर सकें।

गौरतलब है कि नोटबंदी और राफेल सौदे पर सीएजी को अपनी रिपोर्ट पेश करनी चाहिए ताकि देश की जनता में इन दोनों ही मामलों को लेकर जो संशय की स्थिति है, वे साफ हो सके। बता दें कि देश की विपक्षी पार्टियों का भी आरोप है कि दोनों मामलों में बड़ा घोटाला हुआ है, जिससे देश के सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। इस खुले पक्ष पर हस्ताक्षर करने वालों में वित्त मंत्रालय के पूर्व प्रमुख सलाहकार एन बाला भास्कर, कोयला मंत्रालय के पूर्व सचिव सी बालाकृष्णन, संस्कृति मंत्रालय के पूर्व सचिव जवाहर सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय के पूर्व सचि केशव देसीराजू आदि शामिल हैं।

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