नोटबंदी बेअसर: जाली नोटों और संदिग्ध लेन देन के मामले से सरकार सकते में

दिल्ली ब्यूरो: मोदी सरकार की नोटबंदी योजना से कुछ तथ्य सामने आये हैं। नोटबंदी करते समय सरकार ने कहा था कि देश से जाली मुद्रा भी खत्म हो जाएंगे तथा संदिग्ध लेन देन असंभव हो जाएगा। लेकीन नोटबंदी के बाद देश के बैंकों को सबसे अधिक मात्रा में जाली नोट मिलने से जुडी रिपोर्ट सामने आने के बाद बहुत सारे सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताविक नोटबंदी के बाद ना सिर्फ जाली नोटों की संख्या बढ़ी है वल्कि इस दौरान संदिग्ध लेन-देन में भी 480 फीसदी से भी अधिक का इजाफा हुआ है।

बता दें कि 2016 में नोटबंदी के बाद संदिग्ध जमाओं पर आयी पहली रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के अलावा सहकारी बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों में सामूहिक रूप से 400 फीसदी अधिक संदिग्ध लेन-देन रिपोर्ट किये गये। इस लिहाज से 2016-17 में कुल मिलाकर 4.73 लाख से भी अधिक संदिग्ध लेन-देन की सूचनाएं प्रेषित की गयीं।

वित्तीय आसूचना इकाई (एफआईयू ) के अनुसार, बैंकिंग और अन्य आर्थिक चैनलों में 2016-17 में जाली मुद्रा लेन-देन के मामलों में इससे पिछले साल की तुलना में 3.22 लाख का इजाफा हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर , 2016 को 500 और 1,000 के नोटों को बंद करने की घोषणा से जुड़ा है। इसमें कहा गया है कि जाली मुद्रा रिपोर्ट (सीसीआर ) की संख्या 2015-16 के 4.10 लाख से बढ़कर 2016-17 में 7.33 लाख पर पहुंच गयी. यह सीसीआर का सबसे ऊंचा आंकड़ा है।

पहली बार सीसीआर 2008-09 में निकाला गया था। सीसीआर लेन-देन आधारित रिपोर्ट होती है और यह तभी सामने आती है, जब जाली नोट का पता चलता है। एफआईयू के मनी लांड्रिंग नियमों के अनुसार, बैंकों और अन्य वित्तीय निकायों को उन सभी नकद लेन-देन की सूचना देनी होती है, जिनमें जाली करेंसी नोटों का इस्तेमाल असली नोट के रूप में किया गया हो या फिर मूल्यवान प्रतिभूति या दस्तावेज के साथ धोखाधड़ी की गयी हो। हालांकि, रिपोर्ट में ऐसी जाली मुद्रा का मूल्य नहीं बताया गया है. एसटीआर तब निकाली जाती है, जब लेन-देन किसी असामान्य परिस्थिति में होता है और इसके पीछे कोई आर्थिक तर्क या मंशा नहीं होती। इस अवधि में ऐसे मामलों की संख्या में 400 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई. वित्त वर्ष 2016-17 में 4,73,000 एसटीआर प्राप्त हुईं, जो 2015-16 की तुलना में चार गुना है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके पीछे प्रमुख वजह नोटबंदी ही है. एसटीआर निकालने के मामले सबसे अधिक बैंकों की श्रेणी में सामने आये. इनमें 2015-16 की तुलना में 489 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वित्तीय इकाइयों के मामले में यह बढ़ोतरी 270 की रही। सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए एसटीआर निकालना जरूरी होता है, जिसे मनी लांड्रिंग रोधक कानून के तहत एफआईयू को भेजा जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी के बाद सामने आई कुछ एसटीआर का संभावित संबंध आतंकवाद के वित्तपोषण से है।

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