पद्मावत और बीफ लिंचिंग के बीच बीजेपी की हार के मायने

अखिलेश अखिल

लखनऊ ट्रिब्यून ब्यूरो: बीजेपी शासित राजस्थान के तीनो सीटों पर कांग्रेस की जीत दर्ज हो गयी है और बीजेपी बुरी तरह से हार गयी है। बीजेपी के लिए यह आत्म मंथन का विषय हो सकता है कि हिंदुत्व की लहर जगाकर भी वह चुनाव क्यों हार गयी ? ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या देश के लोग बीजेपी की हिंदुत्व पर आधारित राजनीति को नकार रहे हैं या अभी सिर्फ यह माना जाय कि अलवर ,अजमेर के हिन्दू और मुसलमानो ने पूरी तरह से बीजेपी की राजनीति को नकार दिया है और आगे देश की बारी है।

बीजेपी इसी विषय पर बहस कर रही है। बहस इस बात पर भी चल रही है कि पद्मावत के हंगामा को शह देने, कोर्ट पर भगवा फहराने, बीफ के नाम पर लिंचिंग की घटनाओं के बाद भी आखिर बीजेपी हार कैसे गई? आपको बता दें कि पिछले साल से ही बीजेपी ने राजस्थान की राजनीति में हिंदुत्व की हवा भरनी शुरू कर दी थी। 2011 के जनगणना के मुताबिक अलवर हिंदु बाहुल्य क्षेत्र भी है। बावजूद इसके बीजेपी को चुनाव हारना पड़ा, क्यों? जाहिर है ना केवल मुसलमानो ने वल्कि तमाम हिन्दुओं ने मिलकर बीजेपी की वाट लगाई है। एक बात और है कि अप्रैल 2017 से लेकर अब तक अलवर में बीफ के नाम पर 3 मुसलमानों की मौत की जा चुकी है। पिछले दस माह की घटनाओं को देखें तो अलवर गाय संबंधित हिंसा का केंद्र रहा है।

पहलू खान- 1 अप्रैल, 2017 गो-तस्करी के आरोप में मुस्लिम पशुपालक किसान को नेशनल हाइवे पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। उमर मोहम्मद- 12 नवंबर, 2017 डेयरी किसान उमर की गाय खरीदकर लौटते वक्त फराही गांव के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शव को गोविंदगढ़, अलवर के पास रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया था। इन घटनाओं ने मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण कर दिया। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि अलवर के मुस्लिम समुदाय ने धर्म के नाम पर वोट दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि अलवर लोकसभा सीट पर कुल 11 प्रत्याशी थे। जिनमें से दो मुस्लिम इब्राहीम खान और जमालुद्दीन भी शामिल हैं। ये दोनों निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे और इन्हे मात्र हजार वोट तक ही मिले हैं।

बीजेपी नेता और अलवर से उम्मीदवार जसवंत सिंह ने चुनाव से पहले कहा था कि “हिन्दू हो तो वोट मुझे देना मुस्लिम हो तो कांग्रेस प्रत्याशी करण सिंह को वोट देना।” यानी अब हार के बाद यह साफ़ हो गया कि जिसने बीजेपी को वोट नहीं दिया सब मुसलमान हैं। आगे की राजनीति कुछ ज्यादा ही रोचक होने वाली है। इस साल के अंत में राजस्थान विधान सभा के चुनाव बहुत कुछ बताएगा जिसका असर लोक सभा चुनाव पर पडेगा।

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