परिवार नियोजन में पुरुष निभायें अपनी जिम्मेदारी

लखनऊ ब्यूरो। उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और 3.1 की कुल प्रजनन दर के साथ उच्च प्रजनन दर वाला राज्य भी है। परिवार नियोजन को लेकर सारा ध्यान महिलाओं पर चला जाता है और पुरुष भी इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से दूर हो जाते हैं चाहे वह समुदाय के हो या स्वयं पुरूष स्वास्थ्य कार्यकर्ता हो।

सिफ्सा की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में गर्भावस्था एवं प्रसव से सम्बन्धित जटिलताओं के कारण एक लाख जीवित जन्मों में मातृ मृत्यु दर 258 है, जिसके लिए गुणवत्तापरक परिवार नियोजन सेवाओं का अभाव एक महत्वपूर्ण कारक है। परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी पर सहयोग संस्था के तत्वाधान में शुक्रवार को होटल गोमती में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पुरुषों को परिवार नियोजन पर अपनी भागीदारी निभाने पर विचार विमर्श किया गया।

सहयोग संस्था के कोआर्डिनेटर प्रवेश वर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पिछले एक साल से अमलतास संस्था के माध्यम से परिवार नियोजन में पुरूषों की भागीदारी को लेकर एक साथ अभियान शुरू किया गया, जिसके तहत सामुदायिक व शैक्षणिक स्तर पर पुरुषों को जागरूक करने व उनको संवेदित करने का कार्य किया गया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश के आंकडे कहते हैं कि 2016 में पुरुष नसबन्दी केवल 2.75 फीसदी तथा महिला नसबन्दी 97.25 फीसदी है। यह मुद्दा सिर्फ परिवार नियोजन या गर्भ निरोधक के साधनों को इस्तेमाल करने का ही नहीं है, वरन माता के स्वास्थ्य का भी है। परिवार नियोजन की सेवाओं के उपयोग न होने की वजह से अनचाहा गर्भ और अनचाहा गर्भपात के कारण बढ़ती महिलाओं की मृत्यु दर चिन्ता का विषय है।

वर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश सबसे अधिक आबादी वाले राज्य के साथ ही उच्च प्रजनन वाला राज्य भी है, प्रदेश में गर्भावस्था एवं प्रसव से सम्बंधित जटिलताओं के कारण एक लाख जीवित जन्मों में मातृ मृत्यु दर 258 है, जिसके लिए गुणवत्तापरक परिवार नियोजन सेवाओं का अभाव एक महत्वपूर्ण कारक है। उत्तर प्रदेश वालेंटियरी हेल्थ आर्गनाईजेशन के प्रमुख जे.पी. शर्मा ने कहा कि परिवार नियोजन के मुद्दे पर सभी कार्य कर रहे हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में यह गति नहीं पकड़ रहा है। इसके लिए जरूरी है कि पुरुषों को जागरूक किया जाये और भ्रान्तियों को खत्म किया जाये।

परिवार नियोजन के लिए कार्य करने वाली आशा, आगंनवाड़ी व एएनएम के महिला होने के कारण पुरुषों को परिवार नियोजन की पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही हैं, जिसके चलते परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण में पुरुषों की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा सभी ग्राम पंचायतों में एक पुरुष को फैमली मेंटर के रूप में प्रशिक्षित करके गांव के पुरुषों को परिवार नियोजन के उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके। कार्यक्रम में आये अतिथियों का स्वागत अमित अम्बेडकर ने किया। संचालन अमलतास संस्था के सचिव अजय शर्मा ने किया।

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