परीक्षा के दौरान होने वाली बेचैनी को दूर भगाने के लिए अपनाएं यह टिप्स

नईं दिल्ली। एग्जाम के दौरान बच्चों को उनके नतीजों की वजह से हमेशा पेपरों से डर और बेचैनी होती है। इससे बच्चों को न उचित ढंग से आराम मिल पाता है। उनको खराब पोषण की शिकायत रहती है। दिमाग में नेगेटिव विचार आते हैं और वह टाइम को मैनेज करने की समस्या से भी जूझते हैं, जिनसे बच्चों में आत्महत्या की भावना घर कर लेती है। यहां माता-पिता और शिक्षकों का यह कर्तव्य बनता है कि वह बच्चों में भरोसा रखें क्योंकि कोईं भी परपेक्ट नहीं होता।

मनोवैज्ञानिक डॉ. के. के. शर्मा पैरंट्स को बच्चों से बातचीत करने की सलाह देते हैं। माता-पिता बच्चों को उनकी समस्याओं से उबारने की कोशिश कर सकते हैं और उन्हें किसी भी स्थिति में अपना आत्मविश्वास न खोने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। यहां परीक्षा के दौरान होने वाली बेचैनी को दूर भगाने के लिए डॉक्टर की ओर से कुछ टिप्स दी जा रही है।

संतुलित आहार से ही स्वस्थ मस्तिष्क और स्वस्थ शरीर का विकास होता है। बच्चों को मिलने वाला संतुलित आहार उन्हें एग्जाम में बेहतर परफॉर्मेस देने में मदद कर सकता है। परीक्षा के दौरान अभिभावक बच्चों को दिए जाने वाले संतुलित आहार की मात्रा को बढ़ा सकते हैं, जिसमें फैट, शुगर और कैफीन की मात्रा कम हो। स्वस्थ रहनसहन के लिए नियमित और्‍ उचित मात्रा में नींद जरूरी है।

अच्छी नींद सोने से छात्रों को कम तनाव महसूस होता है और इससे उनका मूड ख़राब नहीं होता। इससे बच्चों की सीखने की क्षमता होती है। इससे उनकी स्मरणशत्ति और क्षमता में बढ़ोतरी होती है। माता-पिता को यह सुनिाित करना चाहिए कि जब आपका बच्चा देर रात तक या सुबह तड़के पढ़ता है तो आप भी उसके साथ उठकर जागते रहिए, ताकि आप बच्चों को उनके पाठ अच्छी तरह समझने में मदद कर सवें। बच्चों को उनका मनपसंद खिलौना दिलाकर, उन्हें खेलने और टीवी देखने की इजाजत देकर और उन्हें उनके मनपसंद लंच का ऑफर देकर आप उन्हें बेहतर ढंग से पढ़ने और पढ़ाईं पर ध्यान एकाग्र करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।

बच्चों पर दबाव आमतौर से पैरंट्स की तरफ से ही आता है। बच्चों को अच्छे नंबर लाने के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें 100 फीसदी नंबर लाने के लिए दबाव बनाने या मजबूर करने की जगह आप उनकी समस्या को सुन सकते हैं। आलोचना से बचने के लिए बच्चों को पूरा समर्थन मुहैया कराना चाहिए। अगर बच्चे एग्जाम में पेल हो जाते हैं तब भी उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए क्योंकि पेल होना ही जीवन की समाप्ति नहीं होती।

हर कोईं नर्वस होती है। छात्र भी नर्वस होते हैं। आप अपने बच्चों को बताइए कि नर्वस होना पूरी तरह से नॉर्मल और नेचुरल प्रािया है। बच्चों को उनकी बेचैनी को सकारात्मक बनाने में मदद कीजिए, जिससे उनका ध्यान भंग न हो। ये एग्जाम की वुछ टिप्स है, जिससे स्टूडेंट्स, पैरंट्स या टीचर को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए, जिससे बच्चों के दिमाग में आत्महत्या की फीलिग न आ सके।

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