पांच राज्‍यों में बिहार, ओडिशा, आंध्र प्रदेश कोरोना की रफ्तार दे रही टेंशन

नई दिल्‍ली: देश के पांच राज्‍यों में कोविड-19 मामलों की तेज रफ्तार चिंता की वजह बन रही है। इन राज्‍यों का हेल्‍थ इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर भी ठीक नहीं है। अस्‍पतालों में पर्याप्‍त बेड्स नहीं हैं, प्रति लाख आबादी के हिसाब से आईसीयू बेड्स नहीं हैं। आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, ओडिशा और केरल में कोविड मामले सामने आने की रफ्तार सबसे ज्‍यादा है। ये उन 18 राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों में से हैं जहां अबतक 10,000 से ज्‍यादा मामले आ चुके हैं। आंध्र में पिछले हफ्ते डेली केसेज का ग्रोथ रेट 9.3% रहा है जबकि बिहार में 6.1%। इसके अलावा कर्नाटक, ओडिशा और केरल ही देश के वे राज्‍य हैं जहां नए मामले 5% से ज्‍यादा आ रहे हैं।

बिहार और ओडिशा में नहीं हैं इंतजाम
आंध्र प्रदेश में प्रति लाख आबादी में 145 बेड्स उपलब्‍ध हैं जबकि केरल में करीब 254। कर्नाटक में प्रति लाख आबादी पर सबसे ज्‍यादा 392 बेड्स उपलब्‍ध हैं। इसके मुकाबले बिहार में प्रति लाख जनसंख्‍या पर केवल 26 बेड और ओडिशा में सिर्फ 56 बेड्स का इंतजाम है। देशभर में प्रति लाख आबादी पर बेड्स का औसत 137.6 है।
बिहार और ओडिशा की स्थिति चिंताजनक इसलिए भी है क्‍योंकि यहां पर कम टेस्टिंग के बावजूद तेजी से मामले बढ़ रहे हैं। दोनों राज्‍यों में नैशनल एवरेज से कम टेस्‍ट हो रहे हैं, बिहार का टेस्टिंग रेट तो देश में सबसे कम हैं। वहां पर प्रति 1000 लोगों पर सिर्फ 4 टेस्‍ट हो रहे हैं यानी बड़ी संख्‍या में केसेज ऐसे भी हो सकते हैं जिनका पता ही नहीं चल पा रहा और वो संक्रमण फैला रहे हैं। ओडिशा का टेस्टिंग रेट प्रति 1000 पर 11 का है। इतने कम टेस्टिंग रेट में हाई पॉजिटिविटी रेट का मतलब है असल केसेज की संख्‍या कहीं ज्‍यादा हैं। इससे हेल्थ सिस्‍टम पर दबाव बढ़ सकता है।

स्‍वास्‍थ्‍य संकट की तरफ बढ़ रहे दोनों राज्‍य
हमारे ‘वर्ल्‍ड इन डेटा’ ने जिन 86 देशों का डेटा कंपाइल किया है, उनमें सिर्फ 15 ऐसे हैं जहां का टेस्टिंग रेट प्रति 1000 पर 10 से कम है। बिहार और तीन अन्‍य राज्‍य- उत्‍तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और मध्‍य प्रदेश इसी कैटेगरी में आते हैं। ओडिशा और तेलंगाना का टेस्टिंग रेट इससे थोड़ा ही ज्‍यादा है। चिंता ये हैं कि अगर केसेज इसी तरह बढ़े तो बिहार और ओडिशा पर बड़ा स्‍वास्‍थ्‍य संकट आ जाएगा। दोनों राज्‍यों का हेल्‍थ इन्‍फ्रा उतना अच्‍छा नहीं है। राहत की बात ये है कि दोनों राज्‍यों का फैटलिटी रेट (मृत्‍यु-दर) अभी तक बहुत कम (बिहार 0.6, ओडिशा 0.5) रही है। देश में केरल और असम का फैटलिटी रेट ही इससे कम है।

कई जिलों में पर्याप्‍त डॉक्‍टर्स नहीं
दोनों राज्‍यों में कोरोना से होने वाली मौतों की संख्‍या हाल के दिनों में बढ़ी है। बिहार के 38 में से 13 जिले ऐसे हैं जहां कोरोना के मामले राज्‍य के औसत (6.1%) से भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इन सभी जिलों में 500 से ज्‍यादा मामले हो चुके हैं। ओडिशा के 9 जिले स्‍टेट एवरेज से ज्‍यादा स्‍पीड से बढ़ रहे हैं। उनमें से 7 में 500 से ज्‍यादा मामले है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक, बिहार के आधे से ज्‍यादा डॉक्‍टर्स सिर्फ तीन जिलों- पटना, दरभंगा और मुजफ्फरनगर में हैं। यानी राज्‍य के भीतर भी चिकित्‍सा व्‍यवस्‍था समान नहीं है। ओडिशा में भी कमोबेश यही स्थिति है जहां शहरी इलाकों में ज्‍यादा डॉक्‍टर्स हैं और ग्रामीण में बेहद कम।

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