पालघर घटना की सीआईडी जांच पर फिलहाल रोक लगाने से इन्कार

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की गयी हत्या की अपराध जांच विभाग (सीआईडी) से करायी जा रही जांच पर फिलहाल रोक लगाने से शुक्रवार को इन्कार कर दिया तथा राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट तलब की। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने याचिकाकर्ता वकील शशांक शेखर झा की दलीलें सुनने के बाद उन्हें याचिका की एक प्रति महाराष्ट्र सरकार को सौंपने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने, हालांकि इस मामले में राज्य सरकार द्वारा कराई जा रही सीआईडी जांच पर फिलहाल रोक से इन्कार कर दिया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि यह कानून-व्यवस्था की बदतर स्थिति का प्रमाण है, क्योंकि पुलिस प्रशासन ने इस भयावह घटना को रोकने के लिए कुछ नहीं किया। याचिकाकर्ता ने यह भी सवाल उठाया कि पुलिस ने जगह पर भीड़ को इकट्ठा करने की अनुमति कैसे दी, क्योंकि यह लॉकडाउन के नियमों का पूर्ण उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने मामले की जांच के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में आयोग गठित करने अथवा इस अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराये जाने अथवा मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को हस्तांतरित करने का अनुरोध है।

याचिकाकर्ता ने मामले को महाराष्ट्र के पालघर से दिल्ली के साकेत या किसी अन्य फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के निर्देश देने की भी मांग की है। याचिकाकर्ता ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का महाराष्ट्र सरकार को निर्देश देने का भी अनुरोध किया। गौरतलब है कि 16 अप्रैल को, मुंबई से सूरत जाने वाले दो साधुओं की कार को 200 से अधिक लोगों की भीड़ द्वारा रोका गया था। इस भीड़ ने कार पर हमला कर दिया और पत्थर एवं डंडों से हमला किया जिसके परिणामस्वरूप दोनों संतों की मृत्यु हो गई।

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