पिछले चार वर्षों मे 22 हजार करोड़ रुपये की हुयी बैंक लूट

लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो: भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु द्वारा किये गये एक अध्ययन के मुताबिक, भारत के सरकारी बैंकों को वर्ष 2012 से 2016 के बीच फर्जीवाड़े से कुल 22.74 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों का हवाला देते हुए संसद में बताया था कि एक जनवरी से 21 दिसंबर, 2017 तक 179 करोड़ रुपये के बैंक फर्जीवाड़े के 25,800 से ज्यादा मामले सामने आये। मार्च, 2017 में आरबीआई द्वारा जारी किये गये आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 के पहले नौ महीनों में आईसीआईसीआई बैंक से एक लाख रुपये और ज्यादा की रकम के 455 फर्जी लेन-देन पकड़े गये, जबकि एसबीआई के 429, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के 244 और एचडीएफसी बैंक के 237 फर्जी लेन-देन सामने आये। अप्रैल से दिसंबर, 2016 के बीच 177.50 अरब रुपये के फर्जीवाड़े के 3,870 मामले दर्ज करवाये गये।

बैंक धोखाधड़ी की कहानी लगातार जारी है। वर्ष 2011 में सीबीआई को जानकारी मिली कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंट्रल बैंक, ऑरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और आईडीबीआई में 10 हजार फर्जी खाते खोले गये और 1.5 अरब रुपये का लोन दे दिया गया। वर्ष 2014 में मुंबई पुलिस ने सात अरब रुपये के एफडी फ्रॉड में सरकारी बैंकों के कुछ अधिकारियों के खिलाफ नौ एफआईआर दर्ज की थी। एक कंपनी ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 4.36 अरब रुपये का चूना लगाया। कोलकाता के एक उद्योगपति ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे 1.4 अरब रुपये का लोन लेकर कथित तौर पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से ठगी कर ली।

सिंडिकेट बैंक के पूर्व चेयरमैन और एमडी एस के जैन द्वारा रिश्वत लेकर 80 अरब रुपये का लोन देने का मामला। वर्ष 2015 में जैन इन्फ्रा प्रॉजेक्ट्स के कर्मचारियों ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के साथ कथित तौर पर 2.12 अरब रुपये के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों ने विदेशी एक्सचेंज स्कैम में 60 अरब रुपये का फर्जीवाड़ा किया। वर्ष 2016 में चार लोगों ने सिंडिकेट बैंक में 386 अकाउंट्स खुलवा कर 10 अरब रुपये का फर्जीवाड़ा किया। बैंक को चूना लगाने के लिए फर्जी चेक, लेटर ऑफ क्रेडिट (लेटर ऑफ अंडरस्टेंडिंग) और एलआईसी पॉलिसीज का सहारा लिया।

वर्ष 2017 में सीबीआई ने आईडीबीआई बैंक का 9.5 अरब रुपये का लोन वापस नहीं करने के आरोप में विजय माल्या और 10 अन्य के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया। लगभग 11.61 अरब रुपये की दोषपूर्ण हानि के आरोप में पांच सरकारी बैंकों के खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की और डेक्कन क्रॉनिकल होल्डिंग्स के खिलाफ छह चार्जशीट दायर किये। करीब 20 बैंकों को 22.23 अरब रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में कोलकाता के नामी कारोबारी नीलेश पारेख को सीबीआई ने गिरफ्तार किया। दो सरकारी बैंकों को 2.9 अरब रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में अभिजीत ग्रुप के प्रमोटर्स और कैनरा बैंक के पूर्व डीजीएम को गिरफ्तार किया गया। करीब 8.36 अरब रुपये मूल्य के कथित घोटाला मामले में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व जोनल हेड और सूरत की एक प्राइवेट लॉजिस्टिक्स कंपनी के डायरेक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया। अभी वर्ष 2018 के शुरुआत में ही प्रवर्तन निदेशालय ने आंध्र बैंक के डायरेक्टर को पांच अरब रुपये के कथित बैंक फ्रॉड के आरोप में गिरफ्तार किया।

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