पिता और बेटे ने मिलकर बनाई अनोखी पानी की टंकियाँ, हुनर से भारत में बनाई अपनी पहचान

भारत में हुनर की कोई कमी नहीं है। आज भी कई लोगों ने अपने हुनर से ही भारत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है। कई लोग अपने अनोखे हुनर के कारण देश विदेश में अपनी पहचान रखते हैं। आज हम आपको पिता और बेटे की एक ऐसी ही जोड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपने अनोखे हुनर से पूरे भारत में अपनी पहचान को बनाया है। दोनों मिलकर आज अपनी कला से कई लोगों का दिल जीत चुके हैं।

लुभाया कौल और उनके बेटे बलविंदर कौल आज अनोखी पानी की टंकियों का निर्माण करते हैं। खास बात ये है कि ये पानी की टंकियाँ एको कहानी को भी बयां करती है। ये टंकियाँ देखने में भी बेहद सुंदर हैं। दोनों पिता और बेटा मिलकर अलग अलग तरह की टंकियों का निर्माण कर अनेकों लोगों का दिल जीत रहे हैं। हर कोई उनके हुनर की तारीफ भी कर रहा है। आइए जानते हैं खबर को विस्तार से।

जालंधर के इस गाँव को कहते हैं टंकी वाला गाँव

आमतौर पर जब टंकी की बात आती है तो हमारी आँखों के सामने काले रंग के बड़े बड़े टैंकों की तस्वीर आने लगती है। ये होना लाज़मी भी है क्यूंकि सामान्य तौर पर इसी तरह के टैंक घर की छतों पर रखे हुए नज़र आते हैं। लेकिन जालंधर एक गाँव में कई अनोखी तरह की टंकियों का निर्माण किया जाता है। इस गाँव को टंकी वाला गाँव का नाम भी दिया जाता है।

इस गाँव का नाम उप्पला गाँव है वहीं जालंधर शहर के भी कई घरों में इन टंकियों को देखा जा सकता है। इस शहर के घरों की छत पर कमल, एयरप्लेन, घोड़े और हवाई जहाज़ जैसी कई आकृतियों की टंकियाँ बनी हुई हैं। वहीं हर घर की हर टंकी कुछ न कुछ कहानी को भी बयां करती है। इस गाँव में अनोखी टंकियाँ बनाने का श्रेय सिर्फ लुभाया कौल और उनके बेटे बलविंदर कौल को जाता है।

लुभाया पंजाब के जालंधर के रहने वाले हैं और आज उनके बेटे बलविंदर के साथ मिलकर अपने हुनर से जालंधर की एक नई तस्वीर को पेश कर रहे हैं। दोनों मिलकर आज कई अनोखे तरह की टंकियों को बनाते हैं। इनकी बनाई टंकी वाकई बेहद ही खूबसूरत होती हैं और कुछ न कुछ कहानी को भी बयां करती हैं। आज हर कोई उनकी बनाई टंकियों को खूब पसंद कर रहा है।

जालंधर की इन पानी की टंकियों को यूनिक वाटर टैंक का नाम दिया जा रहा है। दोनों पिता और बेटे ने मिलकर ही इस पहल को शुरू किया था। दरअसल एक ऑर्डर मिलने के बाद ही दोनों ने इस तरह की टंकियों को बनाना शुरू किया था। लुभाया को 1995 में एक अनोखा टैंक बनाने का ऑर्डर मिला था जिसमें उन्हें फुटबॉल के आकर का वाटर टैंक बनाना था। इसके बाद ही उन्होंने ऐसी टंकियाँ बनाना शुरू किया।

उन्होंने अच्छे से इस फुटबॉल टैंक को तैयार कर दिया जिसके बाद उनके पास ऐसे ही अनोखे टैंक बनाने के ऑर्डर आने लगे। आज वे बेहद ही अनोखे आकर के टैंकों को भी बनाते हैं। जो देखने में भी बेहद अद्भुत लगती हैं। हालांकि उनके लिए भी ये काम करना आसान नहीं होता है लेकिन दोनों मिलकर इस काम को अच्छे से कर रहे हैं। इसके लिए जब उन्हें ऑर्डर मिलता है तो सबसे पहले उसका डिज़ाइन तैयार किया जाता है।

डिज़ाइन तैयार करने के बाद स्टील से उसका स्टेचू तैयार किया जाता है। इसके बाद सरिये से ढांचा तैयार करने के बाद ही उसे टैंक का आकर दिया जाता है। इसके बाद ढांचे पर रंग करके उसे और सुंदर बना दिया जाता है। इस तरह की टंकी आपको जालंधर के कई घरों में रखी हुई मिल जाएगी।

दरअसल जालंधर के ज़्यादातर लोग एनआरआई हैं। ऐसे में ये टंकियाँ इन्हीं NRI लोगों की कहानियों को बयां करती हैं। मान लीजिये कि किसी ने मिल्क टैंक बनवाया है तो वे शख्स विदेश में मिल्क का काम करता है। वहीं किसी ने एयर इंडिया का विमान बनवाया है तो वे शख्स विदेश में रहता है।

बता दें की अब तक दोनों मिलकर इस तरह की 3 हज़ार से भी ज्यादा टंकियाँ बना चुके हैं। शुरुआत में उनका काम सिर्फ जालंधर में ही सीमित था लेकिन अब उनका काम हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश जैसे कई राज्यों में फैल चुका है।

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