पीएनबी महाघोटाले में तीसरी रिपोर्ट, घोटाले की रकम बढ़कर हुई 12,900 करोड़

मुंबई: पीएनबी महाघोटाले में 2017 से पहले किए गए फर्जी ट्रांजेक्शन का बीती चार मार्च को एक तीसरा मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही पीएनबी महाघोटाले में हड़पी गई कुल राशि बढ़ कर 12,900 करोड़ रुपये हो गई है। इस रिपोर्ट में नीरव मोदी के फायरस्टार ग्रुप ने दूसरों के साथ मिलकर पीएनबी को 321.88 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। क्योंकि इन कंपनियों के लिए जो फंड बेस्ड और नॉन-फंड बेस्ड लिमिट तय की गई थी, उनका इस्तेमाल उस काम में नहीं किया गया, जिसके लिए मंजूरी दी गई थी। यह लिमिट रफ डायमंड के इंपोर्ट और ज्वैलरी के निर्यात के लिए तय की गई थी। ज्वैलर्स नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और उनकी कंपनियों ने पीएनबी के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके बैंक के साथ धोखाधड़ी की।

पीएनबी की शिकायत पर इस मामले में पहली एफआईआर 31 जनवरी को दर्ज की गई थी। इसमें बताया गया था कि 2017 में 280.7 करोड़ के फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) या गारंटी जारी किए गए थे। दूसरी एफआईआर 15 फरवरी को दर्ज की गई थी, जिसमें एलओयू और फॉरन लेटर्स ऑफ क्रेडिट (नॉन-फंड बेस्ड) के जरिये वित्त वर्ष 2017-18 में 4,886.72 करोड़ के नुकसान का जिक्र किया गया था। तीसरी एफआईआर से पहले सीबीआई को पता चला था कि पीएनबी को चोकसी के गीतांजलि ग्रुप से 6,138 करोड़ और नीरव मोदी ग्रुप से 6,500 करोड़ का नुकसान हुआ था।

4 मार्च की एफआईआर में फंड-बेस्ड लिमिट के मामले में फर्जी ट्रांजैक्शंस की जानकारी है। इसके साथ इसमें छोटी नॉन-फंड बेस्ड लिमिट का भी जिक्र है। इनसे साथ फ्रॉड की रकम 12,918.6 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। हालिया एफआईआर में मोदी, उनकी फ्लैगशिप कंपनी फायरस्टार इंटरनेशनल लिमिटेड (एफआईएल) और फायरस्टार डायमंड्स इंटरनैशनल प्राइवेट लिमिटेड (एफडीआईपीएल), फायरस्टार इंटरनैशनल के सीएफओ रविशंकर गुप्ता, प्रेसिडेंट (फाइनेंस) विपुल अंबानी, फायरस्टार इंटरनेशनल और पीएनबी के अज्ञात कर्मचारियों पर धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का आरोप लगाया गया है।

इसमें बताया गया है कि इनकी वजह से पीएनबी को 321.88 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। पहली एफआईआर में नीरव मोदी और उनकी तीन पार्टनरशिप कंपनियों का नाम आया था, लेकिन उसमें फ्लैगशिप कंपनी फायरस्टार का जिक्र नहीं था। सीबीआई ने कहा कि कंसोर्शियम बैंकिंग के तहत पीएनबी ने फायरस्टार ग्रुप को सैंक्शंड फंड और नॉन-फंड बेस्ड क्रेडिट लिमिट दी थी। यह लिमिट 380 करोड़ रुपये से अधिक की नहीं दी गई थी। इसमें से 259.37 करोड़ रुपये का भुगतान पीएनबी को 4 मार्च को किया जाना था क्योंकि इस लिमिट को 8 फरवरी को वापस ले लिया गया था। इसी तरह, 72.5 करोड़ रुपये की लिमिट फायरस्टार डायमंड इंटरनेशनल में से 62.51 करोड़ का भुगतान पीएनबी को किया जाना था।

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