पीएफआई ने खींचा था हिंसा का खाका, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

लखनऊ: नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में लखनऊ समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में हिंसा फैलाने का खाका पॉपुलर फ्रंट ऑफ इण्डिया (पीएफआई) ने खींचा था। काफी लम्बे वक्त से उत्तर प्रदेश में अपनी पैठ जमाने में लगे संगठन के सदस्यों ने सीएए व एनआरसी के विरोध में सोशल मीडिया पर कैम्पेन चलाकर आम जनता के बीच गलत संदेश फैलाया था। इसके बाद विभिन्न संगठनों के साथ बैठकर बवाल की बिसात बिछायी थी। सोमवार को लखनऊ पुलिस ने पीएफआई की साजिश का खुलासा करते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा शामली जिले में पीएफआई के 13 कार्यकर्ताओं समेत 28 लोगों को हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि पीएफआई का प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद इन्दिरानगर में ए-ब्लॉक के जय मंगल हॉस्पिटल स्थित विकास भवन मोड़ के पास रहता है। बीते बृहस्पतिवार को हसनगंज के मदेयगंज, ठाकुरगंज के सतखण्डा व हजरतगंज के परिवर्तन चौक पर हुई हिंसा के आरोप में बीते 20 दिसम्बर को पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था।पुलिस पूछताछ में आरोपित वसीम ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इण्डिया से कोई भी संबंध न होने की बात कही थी। पुलिस जांच के बाद एसएसपी ने बताया कि वसीम पीएफआई का प्रदेश अध्यक्ष है। वसीम ने ही अन्य संगठनों से सीएए पर विरोध प्रदर्शन में साथ देने की बात कही थी।वसीम से पूछताछ के बाद सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा व इंस्पेक्टर धीरेन्द्र प्रताप कुशवाहा की टीम ने बाराबंकी के कुर्सी थाना स्थित ग्राम गौराहार मजरा बरौली निवासी नदीम व बाराबंकी के रामनगर स्थित इब्राहिमपुर निवासी असफाक को गिरफ्तार किया।

सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि आरोपित नदीम पीएफआई का कोषाध्यक्ष व असफाक डिवीजन प्रेसीडेंट है। आरोपित असफाक का क्षेत्र बहराइच, बाराबंकी, गोण्डा व श्रावस्ती है। आरोपित नदीम ने पूछताछ में कबूला कि संगठन ने प्रदर्शन के लिए फंड जुटाया था। बीते गुरुवार को लखनऊ समेत अन्य जनपदों में हुए विरोध प्रदर्शन में पीएफआई ने अपने कोष से रुपये खर्च किये थे। उसी रकम से सीएए व एनआरसी के विरोध में बैनर, पोस्टर, झण्डे व तख्तियां बनवायी गयी थी। पुलिस ने आरोपित नदीम व असफाक के पास से 26 तख्ती, 29 झण्डे, 100 पैम्पलेट्स व 36 पेपर कटिंग बरामद की है।

इसके अलावा उनके पास से रामजन्म भूमि बनाम बाबरी मस्जिद, भारत में जनवादी अधिकार आंदोलन, अयोध्या-राजनैतिक शतरंज का मोहरा, आतंकवाद भ्रम व सत्य, द स्टोरी ऑफ बाबरी मस्जिद, उर्दू बाबरी मस्जिद की कहानी व अन्य साहित्य की किताबें बरामद हुई हैं। उनका कहना है कि गिरफ्तार आरोपित नदीम व असफाक के मोबाइल फोन से व्हाट्सएप, मेल व मैसेज में हिंसा फैलाने के महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस ने आरोपितों को जेल भेज दिया है।

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