पीएम आवास में जमकर हुआ भ्रष्टाचार, कोई घरवाली ले आया तो शराब गटक गया

भोपाल: गरीबों को सिर पर छत मुहैया कराने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना से गरीबों की जीवन स्तर में जहां सुधार आया है तो वहीं कई स्थानों पर इस योजना का दुरुपयोग भी सामने आया है। यूं तो प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश, देशभर में अव्वल है। राज्य में गरीबों को अब तक सर्वाधिक तीन लाख से अधिक आवास उपलब्ध करा दिए गए हैं लेकिन इस योजना की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है।

जिलों से जुटाई गई जानकारी में एक बड़ा सच सामने आया है कि ‘आवास के नाम पर मिली राशि से कोई हितग्राही अपने लिए बाहर से घरवाली ले आया तो किसी ने शराब में योजना की राशि उडा दी। किसी ने ट्रेक्टर खरीद लिया या फिर कर्ज चुका दिया। पता चला है कि आदिवासी किश्त की राशि से आवास नहीं बल्कि दूसरे काम कर रहे हैं जबकि छतरपुर, टीकमगढ़, सतना, सागर और सिवनी में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कराहल विकासखंड का एक आदिवासी 40 हजार रुपए में गुजरात से घरवाली खरीद लाया। ग्राम पंचायत हांसापुर के विनोद आदिवासी दूसरी किश्त के 40 हजार रुपए से शराब गटक गया। मेवाड़ा गांव के राधेश्याम बैरवा ने 40 हजार रुपए में पुराना कर्जा चुका दिया। रामनिवास मेवाड़ा ने पहली किश्त से ट्रेक्टर खरीद लिया। बासोंदा ग्राम पंचायत के धानोदा गांव के मोरपाल माली राशि लेकर फरार हो गया। कराहल का मुकेश आदिवासी 40 हजार रुपए लेकर जयपुर में रोजगार करने लगा।

लुहारी गांव के गिरराज आदिवासी, रामरतन और महावीर आदिवासी ने भी राशि दूसरे कामों में खर्च कर दी। लुहारी पंचायत के सरपंच धनराज आदिवासी के बड़े बेटे मनकीलाल को आवास स्वीकृत हुआ। उसने राशि अन्य कामों में खर्च कर दिया। सिवनी जिले के घंसोर में ग्राम पंचायत बालपुरमाल के तिन्सरा गांव में वर्ष 2013 में मृत व्यक्ति गिरधूलाल के नाम पर पीएम आवास मंजूर हो गया।

मालूम हो कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री गोपाल भार्गव ने पिछले विधानसभा सत्र के दौरान एलान किया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी की सूचना देने वाले को 5000 रुपए का इनाम दिया जाएगा। मंत्री की घोषणा के कई माह बीतने के बाद प्रदेश में इनाम पाने के हकदार सामने नहीं आए हैं।

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