पीएम मोदी ने 31 दिन में कीं 87 जनसभाएं, तीन रोडशो

नई दिल्ली: लोकसभा चुनावों में प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 31 दिन में 87 जनसभाओं को संबोधित किया है। इस दौरान उन्होंने 3 रोड शो किए हैं। अब तक 4 चरणों का मतदान हो चुका है। उनका मुख्य फोकस इस बार राष्ट्रवाद पर है। विपक्षी गठबंधन को ‘महामिलवाट’ के रूप में परिभाषित करते हुए वह जनता से इनसे दूर रहने का आह्वान कर रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रवाद के मुद्दे को बार-बार उठाते हैं। इसके साथ ही ‘महामिलवाट’ की सरकार को देश के विकास में बाधक बताते हैं। दिलचस्प बात यह है कि अब तक हुई प्रधानमंत्री की 50 फीसदी रैलियां और रोडशो सिर्फ 5 प्रदेशों में ही हुए हैं। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात में प्रधानमंत्री ने अपनी आधी से अधिक रैलियां और रोडशो किए हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश और बंगाल में सातों चरणों में चुनाव हैं और पीएम मोदी इन राज्यों में अपनी मौजूदगी प्रमुखता से दर्ज कर रहे हैं।

पीएम मोदी के भाषणों का आधार मुख्य तौर पर राष्ट्रवाद और सर्जिकल स्ट्राइक रहता है। सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाने के लिए पीएम मोदी विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साध रहे हैं। मुख्य विपक्षी दल के साथ एसपी-बीएसपी और टीएमसी पर भी इस बहाने करारा जुबानी वार कर रहे हैं। श्रीलंका में ईस्टर के दिन हुए हमलों का जिक्र करते हुए भी प्रधानमंत्री बार-बार जोर दे रहे हैं कि देश को आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए उनकी मजबूत नेतृत्व वाली सरकार की जरूरत है।

इन चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण से कुछ मुद्दे पूरी तरह से गायब नजर आ रहे हैं। पीएम मोदी अब अपनी रैलियों में कांग्रेस घोषणापत्र के प्रमुख न्याय योजना का जिक्र भी नहीं करते हैं। हालांकि, पिछले महीने मेरठ में एक रैली के दौरान उन्होंने कहा था कि जो लोग दशकों राज करने के बाद भी गरीबों का बैंक अकाउंट नहीं खोल पाए, वो अब उनके खाते में पैसे डालने की बात कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्षी दलों के आरोपों पर भी करारा पलटवार करने से नहीं चूक रहे हैं। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने जब प्रधानमंत्री मोदी को ‘फर्जी पिछड़ा’ करार दिया तो पीएम मोदी ने पलटवार करते हुए कहा कि सबसे पिछड़ी जाति से आने का उन्हें गर्व है। अपने कुछ भाषणों में पीएम मोदी ने राहुल गांधी के अल्पसंख्यक बहुल वायनाड की सीट से चुनाव लड़ने का भी जिक्र किया है। विपक्षी दलों के हिंदू आतंकवाद के मुद्दे को भी उन्होंने उठाया है।

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