पीछे नहीं हटा ड्रैगन आज तो चुकानी पड़ेगी भारी कीमत!

नई दिल्ली: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पिछले एक महीने की तनातनी खत्म करने के लिए आज भारत और चीन की सेना के बीच कोर कमांडर स्तर की मीटिंग होने जा रही है। इस मीटिंग में गलवान एरिया, पैंगोग त्सो और गोगरा एरिया पर चर्चा होने की उम्मीद है और एलएसी पर मई से पहले की तरह स्थिति बहाल करने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से चीन जिस तरह आग उगल रहा है, उससे इस बैठक के नतीजे को लेकर कई सवाल पैदा होने लगे हैं। इससे यह भी आशंका पैदा होने लगी है कि क्या इस मीटिंग का हश्र भी पिछली बैठकों की तरह ही तो नहीं होगा? हालांकि, यदि चीन ऐसा करता है तो उसकी बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ सकती है।

क्या चीन झेल पाएगा बाकी मुल्कों का दबाव?
इस बैठक पर अमेरिका, रूस जैसे ताकतवर मुल्कों के अलावा चीन और भारत के पड़ोसी देशों की भी नजर टिकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही मध्यस्थता की पेशकश कर चुके हैं। हालांकि, चीन ने इस प्रस्ताव को नकार दिया है। इसके बावजूद अमेरिका की खास नजर होगी। चीन भी नहीं चाहेगा कि अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के कारण पहले ही उसकी इकॉनमी को सेंध लग चुकी है। कोरोना ने इसे जबर्दस्त चोट पहुंचाई है। ऐसे में किसी भी कीमत पर इस मीटिंग से चीन यह संदेश देना चाहेगा कि वह पड़ोसी मुल्कों के साथ दोस्ती और शांति को लेकर प्रतिबद्ध है।

भारत-ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती से चीन को दर्द
हाल के दिनों में भारत और ऑस्ट्रेलिया की बीच दोस्ती ने चीन की चिंता बढ़ा दी है। खासकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया प्रधानमंत्री कॉट मॉरिसन के बीच व्यक्तिगत तौर पर भी अच्छे रिश्ते हैं। हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को नाकाम करने के लिए भारत और ऑस्‍ट्रेलिया ने एक-दूसरे के सैन्‍य अड्डों के इस्‍तेमाल का अहम समझौता भी किया है।

वैसे भी चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच इन दिनों तलवारें खीचीं हुई हैं। चीन द्वारा ऑस्ट्रेलिया को अमेरिका का ‘कुत्ता’ करार देने वाली बात अभी भी वहां के लोग भूले नहीं हैं। ऐसे में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच ताजा समझौता चीन को बड़ा दर्द दे सकता है।

चौतरफा घिरा चीन तो फिर क्या करेगा?
ऐसी बात भी नहीं है कि चीन और भारत के बीच यह तनाव महज दो मुल्कों के बीच की बात है। भले ही यह द्विपक्षीय मसला है और दोनों मुल्क इसे शांतिपूर्वक और बातचीत से सुलझाने की बात कह रहे हैं, पर यदि तनाव और गहराता है तो दुनिया के बाकी देश कतई चुप नहीं बैठेंगे। खासकर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस जैसे कुछ और पश्चिमी मुल्क चीन को संयुक्त राष्ट्र में घेरने की कोशिश करेंगे। कोरोना मुद्दे पर पहले से ही घिरा चीन की उस वक्त किरकिरी होनी तय है।

कोरोना से फजीहत, यहां इज्जत पर चोट
एलएसी पर तनातनी की वजह चीन भले ही लद्दाख में भारतीय सेना की ओर से सीमा का कथित उल्लंघन बता रहा हो, पर सच्चाई इसके परे है। कोरोना वायरस की उत्पति और जानकारी छिपाने के आरोप में चीन पहले से ही चौतरफा घिरा है। वर्ल्ड पावर बनने की चीनी चाहत को कोरोना ने बड़ी चोट दी है।

ऐसे में कमजोर होती इकॉनमी और बेरोजगारी बढ़ने की डर से चीन ने भारतीय सीमा पर तनाव का चाल चल अपनी जनता को गुमराह करने की कोशिश की है। मौजूदा दौर में जंग दूर-दूर तक नजर नहीं आती है। ऐसे में चीन को कहीं न कहीं कदम पीछे खींचना होगा, नहीं तो उसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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