पुत्र ही क्यों देता शव को मुखाग्नि?

लखनऊ: भारत मान्यताओं और परम्पराओं का देश है। यहाँ तमाम तरह की परम्पराएँ हैं। इन परम्पराओं में एक परंपरा यह भी है कि यहाँ किसी भी शव को मुखाग्नि पुत्र ही देता है। क्या आपको पता है कि मृत व्यक्ति को मुखाग्नि परिवार के अन्य सदस्यों को छोड़कर उसका बेटा ही क्यों देता है?

इस संबंध में हमारे शास्त्रों में उल्लेख है कि पुत्र पुत नामक नर्क से बचाता है अर्थात् के हाथों से मुखाग्नि मिलने के बाद मृतक को स्वर्ग प्राप्त होता है। इसीलिए मान्यता के आधार पर पुत्र होना कई जन्मों के पुण्यों का फल बताया जाता है।

पुत्र ही माता-पिता का अंश होता है। इसी वजह से पुत्र का यह कर्तव्य है कि वह अपने माता-पिता की मृत्यु उपरांत उन्हें मुखाग्नि दे। इसे पुत्र के लिए ऋण भी कहा गया है।

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