पृथ्वी के इतिहास की नई खोज, भूवैज्ञानिकों ने खोजा ‘मेघालय युग’

लंदन: पृथ्वी पर न जाने कितने लाखों-करोड़ों वर्षों की संस्कृति के सबूत मिलते रहते है और वैज्ञानिक इन तथ्यों का अनवेषण कर नए रहस्यों का पता लगाते हैं। भूवैज्ञानिकों ने धरती के इतिहास में एक नए युग की खोज की है और खास बात यह है कि इसका भारत के मेघालय से कनेक्शन है। वैज्ञानिकों ने आज से 4200 साल पहले शुरू हुए धरती के इतिहास को ‘मेघालय काल’ का नाम दिया है। इस दौरान विश्व भर में अचानक भयंकर सूखा पड़ा था और तापमान में गिरावट दर्ज हुई थी। इस वजह से पूरे विश्व में कई सभ्यताएं खत्म हो गईं थीं। अब सवाल यह है कि आखिर इसका नाम मेघालय युग क्यों रखा गया?

दरअसल शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने मेघालय की एक गुफा की छत से टपक कर फर्श पर जमा हुए चूने के ढेर या स्टैलैगमाइट को जमा किया। इसने धरती के इतिहास में घटी सबसे छोटी जलवायु घटना को परिभाषित करने में मदद की। इस वजह से इस मेघालयन एज या मेघालय काल का नाम दिया गया। 4.6 अरब साल के धरती के इतिहास को कई कालखंडों में बांटा गया है। हर कालखंड महत्वपूर्ण घटनाओं जैसे महाद्वीपों का टूटना, पर्यावरण में नाटकीय बदलाव या धरती पर खासतरह के जानवरों, पौधों की उत्पत्ति पर आधारित है। जिस वर्तमान काल में हम रहे हैं उसे होलोसीन युग के नाम से जाना जाता है, जिसमें पिछले 11700 सालों का इतिहास शामिल है, तब से जम मौसम में पैदा हुई एक नाटकीय गर्मी से हम हिम युग से बाहर आए थे।

हालांकि इंटरनैशनल कमिशन ऑफ स्ट्रैटिग्रफी (आईसीएस) के मुताबिक होलोसीन युग को भी बांटा जा सकता है। भूवैज्ञानिक इतिहास और समय का आधिकारिक ब्योरा रखने की जिम्मेदारी आईसीएस की ही है। इसने युग को अपर, मिडल और लोअर चरणों में विभाजित करने का प्रस्ताव दिया है। इन सबमें इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएं दर्ज हैं। इनमें सबसे युवा ‘मेघालय युग’ 4200 साल पहले से लेकर 1950 तक माना जाता है। इसकी शुरुआत भयंकर सूखे से हुई थी, जिसका असर दो शताब्दियों तक रहा। वैज्ञानिकों के मुताबिक अंतिम हिम युग की समाप्ति के बाद कई क्षेत्रों में विकसित हुए कृषि आधारित समाज पर इस मौसमी घटना ने गंभीर प्रभाव डाला था। इसके परिणामस्वरूप मिस्र, यूनान, सीरिया, फलस्तीन, मेसोपोटामिया, सिंघु घाटी और यांग्त्से नदी घाटी में सभ्यताएं प्रभावित हुईं।

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