प्रधानमंत्री की पसंदीदा योजनाएं केवल कागजों पर?

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंदीदा जन धन योजना और अटल पेंशन योजना,जीवन ज्योति जैसी योजनाओं का प्रचार प्रसार तो बड़े पैमाने पर हो रहा है किंतु धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है जिसके कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगने लगा है।

2014 -15 में अटल पेंशन योजना में केंद्र सरकार ने 100 करोड़ों रुपए का बजट आवंटित किया था। जिसमें मात्र 1 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसी तरह 2016-17 में 200 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया। जिसमें से मात्र 29 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

इसी तरह प्रधानमंत्री जन-धन योजना में 2015 -16 में 100 करोड़ रुपए केंद्र सरकार ने आवंटित किए थे। इस में मात्र 10 करोड़ रुपए का खर्च किया जा सका। वर्ष 2016-17 में सरकार ने जो करोड़ों रुपए जन, धन योजना में आवंटित किए थे। किंतु मात्र एक करोड़ रुपए ही खर्च किया गया है।

संसदीय समिति ने रिपोर्ट में जो जानकारी दी है। उसके अनुसार आम आदमी बीमा योजना में 450 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। लेकिन दिसंबर 2016 तक इसमें कोई भी राशि खर्च नहीं की गई। इसी तरह वरिष्ठ बीमा योजना भी कागजों पर और प्रचार अभियान तक सीमित रह गई हैं। केंद्र सरकार ने 109 करोड़ रुपए इस योजना के लिए उपलब्ध कराए थे।

दिसंबर 2016 तक इसमें भी कोई राशि खर्च नहीं की गई। इस मामले में सरकार सफाई दे रही है कि आवंटन की राशि से खर्च नहीं किया गया है किंतु दूसरे स्त्रोत से राशि लेकर खर्च की गई है। बहरहाल, संसदीय समिति ने इस मामले में अधिकारियों को उपलब्ध आवंटन राशि का उपयोग हो। यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

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