प्लास्टिक से जरा संभलकर

अपने टिकाऊपन, स्थिरता और कम कीमत के कारण कई तरह से काम आने वाले प्लास्टिक, पर्यावरण पर बेहद हानिकारक प्रभाव डालते हैं। प्लास्टिक खराब होने के दौरान उससे कई तरह के रसायन निकलते हैं जो जीवों एवं पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। रिसर्चर्स ने पाया कि बेहद साधारण प्लास्टिक जब सूर्य की किरणों के संपर्क में आता है, तो उससे मीथेन और एथिलीन जैसी ग्रीनहाउस गैस पैदा होती है।

यह अध्ययन प्लोस वन पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। जलवायु परिवर्तन को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाली ग्रीनहाउस गैस, साधारण प्लास्टिक के खराब होने से भी बनती हैं। मनोआ की यूनिवॢसटी ऑफ हवाई के अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि ये गैस समुद्रतल, वैश्विक तापमान, धरती एवं महासागर में पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत को प्रभावित करने के साथ ही आंधी-तूफान के लिए भी जिम्मेदार होती हैं, जिससे बाढ़ और सूखे की आशंका बढ़ जाती है।

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