फिर खड़ा हुआ पीएम मोदी के डिग्री पर विवाद !

दिल्ली ब्यूरो: बनारस सीट से नामांकन भरने के बाद पीएम मोदी से जुड़े डिग्री पर फिर से विवाद शुरू हो गया है। नामांकन के दौरान दिए गए हलफनामे में उन्होंने संपत्ति और शैक्षणिक योग्यता से संबंधित जानकारियों की घोषणा की है। मोदी ने बताया है कि 1983 में उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से आर्ट्स में परास्नातक की डिग्री और 1978 में दिल्ली विश्वविद्यालय से आर्ट्स में ही स्नातक की डिग्री हासिल की है। नरेंद्र मोदी की इस घोषणा के साथ उनकी डिग्री को लेकर ठंडे पड़ चुके विवाद ने एक बार फिर से आग पकड़ ली है। सबसे पहले 2016 में नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।

मई 2016 में अमित शाह और अरुण जेटली ने मीडिया के सामने नरेंद्र मोदी की 1978 की कथित डिग्री और मार्क्सशीट पेश की थी। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने बताया था कि नरेंद्र मोदी की जो डिग्री अमित शाह और अरुण जेटली ने दिखाई है, वो पूरी तरह से सही है। ऐसा लगा कि नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद यहीं थम जाएगा,लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आम आदमी पार्टी की तरफ से कहा गया कि नरेंद्र मोदी की डिग्री 1979 की है, जबकि मार्क्सशीट 1978 की। आम आदमी पार्टी ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी की डिग्री प्रिंटेड फॉन्ट में है, जबकि उस समय इस प्रारुप में डिग्री मिलती ही नहीं थी। नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर डाली गई आरटीआई ने इस विवाद को और बढ़ा दिया।

जनवरी 2017 में केंद्रीय सूचना सचिव ने दिल्ली विश्विद्यालय को आदेश दिया कि वो 1978 में पास हुए विद्यार्थियों के बारे में जानकारी सार्वजनिक कर दे। मार्च 2017 में दिल्ली विश्वविद्यालय ने जवाब दिया कि उसके पास 1978 का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने बताया कि वह केवल एक साल पुराने रिकॉर्ड ही अपने पास रखता है, इससे ज्यादा पुराने रिकॉर्ड को हटा दिया जाता है। इसी समय ये मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा। दिल्ली विश्वविद्यालय ने हाई कोर्ट में दलील दी कि वो 1978 के रिकॉर्ड को निजता के आधार पर सार्वजनिक नहीं कर सकता है। वहीं मई 2017 में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने दिल्ली हाई कोर्ट में दिल्ली विश्वविद्यालय की पैरवी करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी की डिग्री की जानकारी मांगने वाले पूरी तरह से अपरिचित हैं और केवल लोगों का ध्यान खींचना चाहते हैं, इसलिए उन्हें डिग्री की जानकारी नहीं दी जा सकती है। इसके साथ उन्होंने दलील दी कि पीएम की डिग्री के बारे में जानकारी देने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। इस दलील के इतर डिग्री की जानकारी मांगने वाले आरटीआई कार्यकर्ता कहते रहे कि उनका मकसद आरटीआई एक्ट की संवैधानिकता को परखना है।

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कुछ ऐसा ही विवाद नरेंद्र मोदी की परास्नातक डिग्री को लेकर भी हुआ। कहा गया कि नरेंद्र मोदी ने 1983 में गुजरात विश्वविद्यालय से ‘एंटायर पॉलिटिकल साइंस’ में परास्नातक की डिग्री हासिल की। लेकिन इसके जवाब में तर्क दिया गया कि ‘एंटायर पॉलिटिकल साइंस’ विषय होता ही नहीं है और गुजरात विश्वविद्यालय में ऐसा कोई विषय पढ़ाया ही नहीं जाता है। मोदी की परास्नातक डिग्री पर उठे विवाद को लेकर बीजेपी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। हालांकि, गुजरात विश्विद्यालय ने जरूर कहा कि मोदी की ये डिग्री असली है। लेकिन गुजरात विश्वविद्यालय ने भी इस ओर कोई रिकॉर्ड जारी नहीं किया है.वहीं, स्नातक डिग्री का मामला अभी भी दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहा है।

सच कहा जाए तो नरेंद्र मोदी ने खुद इस विवाद को बढ़ाने का काम किया। 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान उनके ऐसे अनेक वीडियो मौजूद हैं, जिनमें वे कहते नजर आते हैं कि वे कॉलेज नहीं गए, उन्होंने औपचारिक शिक्षा हासिल नहीं की लेकिन इसके बाद भी वे आज सफलता के नए-नए मुकाम छू रहे हैं। बहरहाल, नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद अभी थमा नहीं है। हालांकि, तथ्य अभी यही है कि नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी हलफनामे में खुद को परास्नातक बताया है।

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