फिर से सकंट में घिरी मैगी, जांच में तय मानकों पर फेल हुई

नई दिल्ली: भारत के कई सारे घरों में खाई जाने वाली मैगी फिर सकंट में आ गई है। इसके पहले भी एक बार मैगी तय मानकों पर फेल हो गई थी। दरअसल उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में नेस्ले के लोकप्रिय ब्रांड मैगी का सैंपल कथित रूप से फेल होने के बाद बुधवार को कंपनी की ओर से सफाई दी गई है। नेस्ले ने बयान जारी करते हुए कहा कि हम फिर दोहराते हैं,मैगी खाने के लिए सौ फीसद सुरक्षित है इसके साथ ही हमें लैब जांच में मैगी के फेल होने का कोई भी आदेश प्रशासन की ओर से नहीं दिया गया है।

कंपनी की ओर से कहा गया है निर्णय करने वाले अधिकारी की ओर से पारित आदेश हमें प्राप्त नहीं हुए हैं,लेकिन हमें बताया गया है कि ये नमूने 2015 के हैं और यह मुद्दा नूडल्स में राख की मात्रा से जुड़ा है’। उन्होंने यह भी कहा,ऐसा लगता है कि यह त्रुटिपूर्ण मानकों को प्रयोग में लाने का मामला है और हम आदेश प्राप्त करते ही तुरंत अपील दायर करेंगे। सहारानपुर जिला प्रशासन ने नेस्ले पर 45 लाख रुपए जबकि इसके तीन वितरकों पर 15 लाख रुपए और इसके दो विक्रेताओं पर 11 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

सहारनपुर जिले के अधिकारियों के मुताबिक, प्रशासन ने पिछले साल नवंबर में नमूने इकट्ठा किए थे और उन्हें लैब जांच के लिए भेज दिया था। जांच में पाया गया कि मैगी के उन नमूनों में इंसान की खपत के लिए तय सीमा से अधिक मात्रा में राख थी। लैब जांच के नतीजों पर सवाल उठाते हुए नेस्ले इंडिया ने कहा कि उस अबतक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है और वह आदेश मिलते ही अपील दायर करेगी।

बात दे कि साल 2015 में मैगी के नमूनों को कई राज्यों में फेल बताते हुए इसे बैन कर दिया गया था। कंपनी के खिलाफ अदालतों में केस दायर किए गए और सड़कों पर लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया। यही नहीं, मैगी का विज्ञापन करने वाले स्टार्स को भी लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ा था।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper