बकौल ‘शत्रु’ महाराज, नाराज और शिवराज तीन खेमों में बटी भाजपा

खामोश! अब प्रदेश की राजनीति में बिहारी बाबू यानी चोटी के फिल्म अभिनेता रहे तथा पूर्व भाजपाई और वर्तमान में कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा से लेकर शोले फिल्म के ठाकुर तक का प्रवेश हो चुका है। शत्रुघ्न सिन्हा ने एक ट्वीट कर राज्य में भाजपा की राजनीति पर तंज किया है कि वह महाराज, नाराज और शिवराज, तीन खेमों में बंट गई है। मंत्रिमंडल विस्तार और फिर विभाग वितरण में चल रही रस्साकशी को लेकर उनकी यह बेबाक टिप्पणी भाजपा के हालात को बयां करने के लिए काफी है और हालात कुछ ऐसे ही हैं। उनका इशारा महाराज याने ज्योतिराज सिंधिया और नाराज याने रूठे हुए भाजपाई से है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने शत्रुघ्न सिन्हा के ट्वीट पर कहा कि शत्रुघ्नजी के एमपी पर ट्वीट करने का क्या मतलब बिहार में भी बयान देते रहते हैं, पहले वह भी इसी संगठन में रहे हैं।कमलनाथ सरकार में मंत्रियों की हालत कैसी थी उस पर कटाक्ष करते हुए पूर्व नेता प्रतिपक्ष और शिवराज मंत्रिमंडल में हाल ही में शामिल किए गए गोपाल भार्गव ने कहा है कि कांग्रेस सरकार में मंत्रियों की हालत शोले फिल्म के ठाकुर जैसी थी। उनका इशारा इस ओर था की वह सरकार में मंत्री तो थे लेकिन वे काम नहीं कर पाते थे। विभाग वितरण में हो रही देरी पर पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि सौदे से सरकार बनी, सोदे से मंत्रिमंडल बना और अब सौदे से विभाग भी बांटेंगे।

कमलनाथ आज से उपचुनावों की होने वाली जंग में कूद पड़े और बदनावर से उन्होंने कांग्रेस के लोकतंत्र बचाओ अभियान की शुरुआत कर दी है। इससे पहले उन्होंने महाकाल की नगरी उज्जैन में महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। बदनावर में पहुंचते ही उन्होंने पहले प्रसिद्ध बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर में पूजा अर्चना की। उनका ऐसा करना राजनीति से जुड़ा होने के कारण इस पर पलटवार करने में भी किसी ने देरी नहीं की और स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृह तथा स्वास्थ्य मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने मोर्चा खोला। कमलनाथ के महाकाल मंदिर जाने के सवाल पर मीडिया में से चर्चा करते हुए शिवराज ने कहा कि जहां जाना चाहें जाएं, इसके साथ ही यह भी जोड़ा कि चुनाव जीतने के लिए भगवान की कृपा के साथ जनता की कृपा जरूरी होती है और जनता उन्हीं पर कृपा की वर्षा करती है जो जनता के लिए बेहतर काम करते हैं। मंत्री डॉ. मिश्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भगवान को झूठ बोलने वाले और धोखा देने वाले पसंद नहीं है। यह पूछे जाने पर कि 13 जुलाई से कमलनाथ पीतांबरा पीठ से अपने अभियान की शुरुआत करने वाले हैं डॉ. मिश्रा ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष बनते ही वह पीतांबरा पीठ गए थे, महाकाल के दर्शन करने उज्जैन भी गए थे और आशीर्वाद मांगा वह मिला भी। जोड़.तोड़ की सरकार बनी पर अपना घर संभाल नहीं पाए। कांग्रेस सरकार ने नौजवानों, किसानों, महिलाओं, आदि को धोखा दिया। अभी कहीं भी चले जाएं कुछ नहीं होगा। मिश्रा ने कांग्रेस पर कपट और छल-छिद्र की राजनीति करने का आरोप लगाया। कमलनाथ सरकार पर आरोप लगाने में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शर्मा भी पीछे रहे उन्होंने आरोप लगाया कि कमलनाथ वल्लभ में बैठकर सौदा करते थे इसलिए उनकी सरकार चली गई।

अभी तक तो ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने आप को जनसेवक कहते थे लेकिन आज बदनावर में जहां उपचुनाव होना है पहली सभा में कमलनाथ ने अपने आप को जनसेवक बताया। वहां उन्होंने कहा कि मैं ना महाराजा, ना टाइगर, ना मामा, मैं तो बस कमलनाथ, एक जनसेवक हूँ। अपनी सरकार की 15 माह की उपलब्धियों का विस्तार से गुणगान करते हुए उनकी नजर में सरकार क्यों गिरी यह भी विस्तार से लोगों को समझाया। उन्होंने वही घिसा पिटा पुराना तर्क देते हुए जनता से पूछा कि आप बताएं मैंने तो माफियाओं से प्रदेश को मुक्त कराया, इसमें मेरी कौन सी गलती थी ? मैंने तो प्रदेश की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाने का कार्य किया, प्रदेश में निवेश लाने का कार्य किया ताकि युवाओं को रोज़गार मिल सके, बेरोज़गारी दूर हो सके। प्रदेश को जिस हालात में शिवराज सिंह चौहान छोड़ कर गए थे यह किसी से छिपा नहीं है। उनके 15 वर्ष के कार्यों को, झूठी घोषणाओं को, हम सभी ने देखा है। 15 महीनों के अंदर प्रदेश में हुए बदलाव की व्याख्या के साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आज जो प्रत्याशी चुनाव लड़ने के लिए आपके समक्ष मैदान में आ रहे हैं वह किस विचारधारा से आएंगे ? यह आपको याद रखना है। ऐसे लोगों को जनता को सबक सिखाना है।कमलनाथ का कहना था कि जनता इन्हें कभी माफ नहीं करेगी। इन्होंने जनता के विश्‍वास के साथ खिलवाड़ किया है। शायद बदलाव की व्याख्या करना उनके लिए भी जरूरी था क्योंकि उनकी सरकार वक्त से बदलाव के नारे के पर ही चुनी गई थी.

और अंत में……..।
इन दिनों एक दूसरे पर व्यंग्य करने और छींटाकशी करने में कोई किसी से पीछे नहीं है, ऐसे में केवल शब्दों की मर्यादा ही तार-तार हो रही है। कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे लाखन सिंह यादव ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की तुलना कोरोना वायरस से कर डाली और कहा कि सिंधिया और उनके करीबी मंत्री इस वायरस से कम नहीं है। विभाग वितरण में हो रही देरी पर लाखन सिंह का कहना था कि यह सिंधिया की वजह से ही हो रही है और वह भाजपा की गले की हड्डी बन गए हैं तथा वह जिस पार्टी में रहते हैं वहां विस्फोट करते ही हैं।

कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे और शिवराज सरकार में मंत्री बने तुलसी सिलावट का दावा है कि प्रदेश में कांग्रेस धरातल में चली गई है। कांग्रेस में व्यक्ति चुनाव लड़ता है और भाजपा में संगठन चुनाव लड़ता है। इतना तो तुलसी भाई ने सही फरमाया पर कांग्रेस कहां खड़ी है यह 24 विधानसभा उपचुनावों में जनता बता देगी कि इस मामले में उनका दावा सही है या नहीं। चुनाव जो न कराए वह कम है। नेता भी नए नए रंग में नजर आते हैं। ऐसा ही पूर्व मंत्री प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ हो रहा है जो मालवी भाषा में सांवेर विधानसभा क्षेत्र में प्रचार कर रहे हैं और तुलसी सिलावट पर जमकर निशाना साध रहे हैं।

अरुण पटेल/ सुबह सबेरे से साभार

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