बगावती तेवर

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद जब मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ शपथ ले रहे थे, तो उन्होंने एक ही बात कही थी और वह थी भगवान राम के प्रदेश में रामराज्य लाने की। लेकिन हुआ उलटा। निर्दोषों को गोली मारने का सिलसिला शुरू हुआ, तो अब उनकी ही पुलिस बागी तेवर में आ गई है। 29 सितम्बर की रात पुलिस वाले यहीं नहीं रुके। सिपाही प्रशांत चौधरी ने एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी को जिस तरह सरेराह मौत के घाट उतारा, वह काफी वीभत्स था। हालांकि मामला मीडिया और सोशल मीडिया में तूल पकडऩे के बाद प्रशांत तो अब जेल में है, लेकिन उसके ‘हमदर्द’ पुलिस वाले उसे गुनहगार मानने को तैयार नहीं हैं। तभी तो प्रशांत के लिए ‘वेलफेयर’ के नाम पर लाखों रुपए का चंदा पुलिसकर्मियों ने इकट्ठा कर लिया। 5 अक्टूबर को प्रशांत के समर्थन में काला दिवस मनाने की खुलेआम घोषणा कर दी गई, लेकिन पुलिस अफसर कुछ नहीं कर पाए। इस घोषणा की बात को 4 अक्टूबर तक सिरे से नकार रहे पुलिस के आला अधिकारियों की बोलती तो उस समय बंद हो गई, जब 5 अक्टूबर को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक पुलिसकर्मी काली पट्टी बांधकर काम पर पहुंचे। लखनऊ के गुड़म्बा, नाका, अलीगंज थाने ही नहीं, बल्कि एसएसपी ऑफिस तक में यूपी पुलिस के सिपाही बांह पर काली पट्टी बांधे दिखाई दिए। पुलिसकर्मियों के इस कृत्य ने साफ दिखा दिया कि हत्या जैसे अपराध को लेकर भी वे कितने असंवेदनशील हैं।

ये योगी आदित्यनाथ की पुलिस है, जो हत्या के आरोपी के पक्ष में बेशर्मी से सीमा तानकर खड़ी है। एप्पल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी को आधी रात के वक्त गोली मारने वाले सिपाही को यूपी पुलिस के ये जवान हीरो बनाने पर तुले हैं। जरा सोचिए कि योगी आदित्यनाथ ने बबूल का जो पेड़ बोया उससे निकले कांटे किस तरह उन्हें और उनकी सरकार को लहूलुहान कर रहे हैं। एनकाउंटर करने की खुली आजादी देकर योगी आदित्यनाथ ने यूपी पुलिस का हौसला इतना बढ़ा दिया कि अब वही पुलिस बगावती तेवर दिखाने लगी है। पुलिसकर्मी हत्या के आरोपी के समर्थन में काला फीता बांधकर ड्यूटी पर आ गए। जबकि एक दिन पहले तक यूपी पुलिस के अफसरान कह रहे थे कि बगावत जैसी कोई बात नहीं है और काली पट्टी लगाकर विरोध जताने का प्लान पूरा नहीं होने दिया जाएगा। अफसरों को शायद खुलेआम सर्विस कोड की धज्जियां उड़ाते पुलिसकर्मी नहीं दिखे, जबकि काली पट्टी बांधकर सेल्फी लेते पुलिस वालों की फोटो मीडिया और सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए। ऐसे में यह बात समझ से परे है कि हत्या के आरोपी के साथ खड़े होकर ये पुलिस वाले साबित कर रहे हैं कि इनका आदर्श क्या है?

अब जरा इंडिया के टाप थ्री थानों में आने वाले गुडंबा थाने के एक दरोगा की बात भी सुन लीजिए। पुलिसकर्मी आरोपी प्रशांत चौधरी व संदीप के पक्ष में सादी वर्दी में विरोध जता रहे दरोगा प्रमोद कुमार ने कहा, ‘जिसके दिल में जिगरा नहीं है, वह पुलिस विभाग में रह कर नपुंसक है।’ इतना ही नहीं दूसरे बड़बोले पुलिसकॢमयों ने तो यह तक कह दिया कि हमें सस्पेंड होने से डर नहीं लगता। कितने इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टरों व कांस्टेबलों को सस्पेंड करेंगे? हम लोग पुलिस लाइन और जेलों को भर देंगे। दूसरी ओर यूपी पुलिस के मुखिया ओपी सिंह इसकी सफाई में कहते हैं कि पुलिस बल में ढाई लाख जवान हैं। कुछ सिपाहियों द्वारा विरोध करने को विद्रोह नहीं कह सकते। वह कहते हैं कि जिन्होंने इस तरह की तस्वीरें सोशल मीडिया में डाली हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि डीजीपी के बयान का शायद ही कोई असर खाकी के निचले तबके पर हो रहा हो? तभी तो नोएडा से लेकर ललितपुर तक, कौशांबी से लेकर कानपुर तक, हर तरफ पुलिस और दरोगा हत्या के आरोपी सिपाही के बचाव में उतर आए हैं। फेसबुक हो, ट्विटर हो या फिर सोशल मीडिया का कोई और प्लेटफॉर्म, पुलिसकॢमयों ने अपने ही महकमे के बड़े अफसरों के खिलाफ बगावती तेवर अपना रखे हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस राज्य कर्मचारी परिषद खुलकर विवेक तिवारी हत्याकांड के आरोपी प्रशांत चौधरी के समर्थन में उतर आई है। संगठन के महासचिव अविनाश पाठक साफ कहते हैं कि राज्य पुलिस के सभी सिपाही आरोपी सिपाही की बिना जांच के बर्खास्तगी और उसे जेल भेजे जाने के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। इतना ही नहीं, पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन ने तो बाकायदा मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को पत्र तक लिख दिया है। पत्र में कहा गया है कि जो पुलिस कर्मचारी या अधिकारी ड्यूटी निभाते वक्त मारे गए हैं, उन्हें भी विवेक तिवारी के परिवार की तरह 40-40 लाख रुपए दिए जाएं। उन पुलिसवालों के बच्चों और परिवारवालों को भी सरकारी नौकरी दी जाए। उनको मकान भी दिए जाएं। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को तत्काल वापस लिया जाए।

पुलिस के बगावती होते तेवर और न सिर्फ आला अधिकारियों, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘खामोशी’ के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन हालात के लिए जिम्मेदार कौन है?

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper