बगुला भगतों को हैरान कर सकती है ट्रांसपैरेंसी इंटरनैशनल की रिपोर्ट

अखिलेश अखिल

भगत भाइयों को अंतराष्ट्रीय संगठन ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की ताजा रपट हैरान कर सकती है। लोभी भक्तों को यह रिपोर्ट निराश करेगी और उत्तेजित भी। भक्त लोग मान रहे थे कि नयी सरकार सब कुछ बदल देगी, भारत बदल जाएगा और भ्रष्टाचार रहित यह देश हो जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हालिया रपट बता रही है कि भ्रष्टाचार को लेकर भारत के सरकारी क्षेत्र की छवि दुनिया की निगाह में अब भी खराब है। वैसे 2015 की तुलना में स्थिति में सुधार के संकेत हैं लेकिन संतोष करने लायक तो कतई नहीं।

संस्था की ताजा रपट ग्लोबल करप्शन इंडेक्स-2017 में देश को 81वें स्थान पर रखा गया है जबकि पिछले साल की रपट में भारत 79वें स्थान पर था। इतने पर भला कौन संतोष करे। सब ख़राब ही तो है। मामला केवल भ्रष्टाचार तक ही सीमित होता तो शाह लिया जाता। क्योंकि हम मानते हैं कि हमारे खून में ही भ्रष्टाचार की कीटाणु है। हम सुधर नहीं सकते। बस मौक़ा मिलने की देर है। भ्रष्टाचार पर पालते रहेंगे और भ्रष्टाचार पर बोलने से बाज नहीं आएंगे। भक्तों में यह बिमारी कुछ ज्यादा ही घर कर गयी है।

ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल ने कहा है, ‘पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कुछ देशों में पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, विपक्षी नेताओं और यहां तक कि कानून लागू करने वाली और नियामकीय एजेंसियों के अधिकारियों तक को धमकियां दी जाती हैं। कहीं कहीं स्थित ऐसी बुरी है कि उनकी हत्याएं तक कर दी जाती हैं। ’ रपट में कमेटी टू प्रोटेक्स जर्नलिस्ट्स का हवाला देते हुए कहा गया है कि इन देशों में छह साल में 15 ऐसे पत्रकारों की हत्या हो चुकी है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ काम कर रहे थे।

इस मामले में रपट में भारत की तुलना फिलीपीन और मालदीव जैसे देशों के साथ की गयी है और कहा गया है कि ‘ इस मामले में ये देश अपने क्षेत्र में बहुत ही खराब हैं। भ्रष्टाचार के मामले में इन देशों के अंक ऊंचे हैं और इनमें प्रेस की आजादी अपेक्षाकृत कम और यहां पत्रकारों की हत्याएं भी ज्यादा हुई हैं। इस सूची में न्यूजीलैंड और डेनमार्क 89 और 88 अंक के साथ सबसे ऊपर हैं। दूसरी तरफ सीरिया, सूडान और सोमालिया क्रमश: 14, 12 और 9 अंक के सबसे नीचे हैं। इस सूची में चीन 77वें और ब्राजील 96वें और रूस 135वें स्थान पर हैं।

जाहिर है यह रिपोर्ट भगत भाइयों को रास नहीं आएगी। जो काम पिछली सरकार में हो रहे थे वही काम अब भी जारी है। घूसखोरी ,ठगी ,घोटाला ,दलाली और झूठवाद का हम इतिहास रचते रहे हैं जो अब भी जारी है। हम बदले नहीं। फिर तब और अब में क्या अंतर।

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