बच्चों के मनोविज्ञान को समझते हुए दी जाये शिक्षा : जावेद

लखनऊ ब्यूरो। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा निगरानी समिति के सदस्य जावेद ने कहा कि शिक्षकों का भय बच्चों के मन से समाप्त करना होगा, तभी बच्चे का विकास होगा। बच्चों की दिनचर्या में भिन्न भिन्न प्रकार की गतिविधियां होती है और इस मनोविज्ञान को समझते हुए ही शिक्षा देनी चाहिए।

समिति के सदस्य जावेद ने शनिवार को पत्रकारो से बातचीत में कहा कि आज बच्चों के दिमाग पर शिक्षा का अतिरिक्त भार है। उनकी शिक्षा में कई भाषा और पुस्तकें शामिल हो गयी हैं। ये जरूरी है, फिर भी बच्चों के मनोविज्ञान को समझते हुए शिक्षा की दिशा तय होनी चाहिए। जावेद ने कहा कि मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित होने वाले बच्चों को मिलने वाली शिक्षा उनमें पूरी ग्रहित नहीं हो पाती है। ऐसे में प्रताडऩा न देते हुए बच्चों के रूचि का विषय चुनने दिया जाना चाहिए, फिर भाषा ऊर्दू हो या फिर हिंदी।

उन्होंने कहा कि केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी ने पोस्को इबाक्स क्लास कक्षा एक से हाईस्कूल तक के विद्यालयों में लगाने एवं कोमल वीडियो दिखाने का आदेश कर चुकी हैं। किसी भी स्थिति में बच्चों को शारीरिक दण्ड ना दिया जाये। ये सबसे ज्यादा जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के मनोविज्ञान को समझते रहना अभिभावक एवं शिक्षकों दोनों को समझना जरूरी है। तभी राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग में होनी वाली शिकायतों में भी कमी आयेगी।

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