बदला पास्को एक्ट, बलात्कारियों को मिलेगी मौत की सजा

दिल्ली ब्यूरो: पीएम आवास पर कैबिनेट की हुयी बैठक में क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट 2018 कैबिनेट में पास हो गया है। इसके साथ ही 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार होने पर बलात्कारी को मौत की सजा मिलेगी। करीब तीन घंटे चली इस मीटिंग में मुख्तार अब्बास नकवी, उमा भारती और स्मृति ईरानी, पियूष गोयल, जे पी नड्डा, रविशंकर प्रसाद, डॉक्टर हर्षवर्धन भी उपस्थित रहे। बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट की बैठक प्रधानमंत्री निवास पर बुलाई गई थी। इस बैठक में पोस्को एक्ट में संशोधन और अध्यादेश लाने पर मंथन किया गया।

पोस्को एक्ट में संशोधन के जरिए 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप पर अधिकतम मौत की सजा करने पर कैबिनेट बैठक में चर्चा की गई। इस बैठक में फ्युजिटिव अफेंडर्स बिल 2018 पर भी अध्यादेश के रूप में चर्चा की गई। बता दें यह बिल संसद में अभी लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट को जवाब देते हुए सरकार ने बताया था कि वह पाॉक्‍सो एक्‍ट में संशोधन की तैयारी कर रही है। इस एक्‍ट में बदलाव के बाद 0-12 साल की बच्‍चियों के साथ रेप के मामले में मौत की सजा का प्रावधान किया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल निर्धारित की गई है।

जानकारी के अनुसार, पाॅक्‍सो एक्‍ट में संशोधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि वह बच्‍चियों के साथ रेप के बढ़ते मामले को रोकने के लिए कानून में किस तरह का बदलाव कर रहे हैं। इस पर सरकार ने बताया था कि पाॅक्‍सो एक्‍ट में संशोधन की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। इस संशोधन के बाद 0 से 12 साल की बच्‍चियों के साथ रेप और अपराध के मामले में अब मौत की सजा का प्रावधान किया जा रहा है।

गौरतलब है कि बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन क्राई (चाइल्ड राइट्स एंड यू) के मुताबिक भारत में हर 15 मिनट में एक बच्चा यौन अपराध का शिकार बनता है और पिछले 10 सालों में नाबालिगों के खिलाफ अपराध में 500 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है। एक रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध के मामलों में से 50 प्रतिशत से भी ज्यादा महज पांच राज्यों में दर्ज किए गए।

इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इसमें कहा गया, “पिछले 10 सालों में नाबालिगों के खिलाफ अपराध में 500 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई और 2016 में 1,06,958 मामले सामने आए जबकि 2006 में यह संख्या 18,967 थी। “

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