बदले-बदले से हैं फूलपुर उपचुनाव के समीकरण

लखनऊ ब्यूरो: इलाहाबाद से एक नेता का फोन आया। लम्बे समय के बाद। हमने पूछा आप कौन है ? उन्होंने कहा, अरे मैं हूँ मैं। काफी दिनों से बात करना चाह रहा था। नंबर नहीं था। आज ही मिला है एक मित्र से। हमें बड़ी ख़ुशी हुयी पुराने मित्र से बात करके। हालचाल जानने के बाद पता चला कि मित्र महोदय अब राजनीति कर रहे हैं। बीजेपी के साथ है और कहीं के स्थानीय नेता बन गए हैं। अगला चुनाव भी लड़ेंगे। यह सब जानकार थोड़ी उत्सुकता बढ़ी। लेकिन हम सोच में भी पड़ गए। यह मित्र पहले राजनीति को बहुत गरियाता था। नेताओं का शत्रु था। नेताओं के बारे में उसके शब्दकोष में इतनी गालियां भरी थी जिसे सुनकर हमलोग लोटपोट हो जाया करते थे। अब वही आदमी नेता बन गया है।

खैर, हमने पूछ लिया कि क्या हाल है फूलपुर चुनाव का ? उनका जवाब जो मिला वह आपके सामने रखना ठीक रहेगा। उन्होंने कहा, ”देखो यहां पहले तो बीजेपी चुनाव जीत गयी थी। कोई सामने था ही नहीं। कांग्रेस को हमलोग कुछ मानते ही नहीं। और सपा के खेल को तो योगी जी ही निपटा देते ,फिर ऊपर से मोदी की माया के सामने भला अबतक कोई टिका है ? मैदान साफ़ था। हालांकि अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है लेकिन अब डॉउट भी हो गया है। सपा के साथ बसपा के आ जाने से साँसे अटक सी गयी है। अब कुछ भी हो सकता है। बसपा का वोट मायने रखता है। यादव और बसपा का दलित वोट ज्यादा दिख रहा है। 3 लाख दलित, 3 लाख मुस्लिम और करीब ढाई लाख यादव वोट कुछ कम नहीं होता।

हमें लगता है कि मुस्लिम वोट तो बंट जाएगा अतीक अहमद और सपा-कांग्रेस के बीच। लेकिन दलित और यादव वोट कितना बटेगा? हम लोग कायस्थ, ब्राह्मण और पटेल वोट को बचाने में लगे हैं। ये वोट करीब 8 लाख के करीब हैं। फिर अन्य पिछड़े और अन्य जातियों के भी करीब 3 लाख वोट है। ये वोट बाटेंगे। हो सकता है कि कुछ वोट ब्राह्मण और कायस्थ के भी बंटे। इसलिए अब कुछ कहना मुश्किल है। ऊपर से भले ही बीजेपी चुनाव जीतती नजर आती हो लेकिन सपा-बसपा का गठबंधन जमीन पर मजबूत है।”

हमने पूछा कि चलो यह सब होता रहता है। तुम्हारा घर परिवार कैसे चल रहा है ? नेता जी चूंकि साफ़ साफ़ बोलने वाले रहे हैं, कह गए-” सब इसी तमाशा से चलता है। चुनाव में भी कुछ हो जाता है और बाकी दिनों में नेतागिरी। अब जब सरकार ही अपनी है तब खेल चलता रहता है। अगले सप्ताह आऊंगा तो बात करूंगा।”

तो फूलपुर की मोटा मोटी तस्वीर कुछ यही है। फूलपुर उपचुनाव के समीकरण अब बदले-बदले से हैं। सपा -बसपा गठबंधन बीजेपी के लिए परेशानी का शबब है। संभव है मोदी ब्रांड के सामने यह गठबंधन कोई करिश्मा ना कर पाए लेकिन गठबंधन के सामने बीजेपी की साँसे फूल जरूर रही है। उधर कांग्रेस के साथ अंतिम दौर में क्या होता है इस पर भी कुछ कहना जल्दबाजी लगती है क्योंकि कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि ब्राह्मणो का बड़ा वर्ग कांग्रेस के साथ है। मुस्लिम ,दलित और पिछड़े भी कांग्रेस को आगे बढ़ा रहे हैं।

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