बरसात के मौसम न खाएं पत्‍तेदार सब्जियां, बीमारियां होने की बढ़ जाती है संभावना

नई दिल्ली: बरसात के मौसम में साग और पत्‍तेदार सब्जियां खाने से मना किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, इस मौसम में इन सब्जियों के सेवन से शरीर में टैक्सिव लेवल बढ़ सकता है। ऐसे में बीमारियां होने की संभावना भी बढ़ जाती है। दरअसल इस मौसम में वातावरण में ह्यूयूमिडिटी बढ़ी रहती है। जो बैक्‍टीरिया और जर्म के प्रजनन का सबसे सही समय होता है। ये पत्‍तों पर प्रजनन करते हैं। जिस वजह से इन्‍हें ना खाना ही बेहतर होता है।

ऐसे में अगर आप इस मौसम में पालक, मेथी, ब‍थुआ, बैंगन, गोभी, पत्‍ता गोभी आदि खरीद रहे हैं तो इन्‍हें इस सावन में खाने से बचें। इन सब्जियों में कीट पतंग काफी मात्रा में प्रजनन करते हैं। शोधों में पाया गया है कि बरसात के मौसम में कीट पतंग अधिक पनपते हैं। इनके प्रजनन का बेस्‍ट मौसम और जगह ये प्रत्‍तेदार सब्जियां होती हैं। इन पर वह अंडे देते हैं और पत्‍तों को खाकर उनका पोषण करते हैं। इसलिए इस मौसम में इन्‍हें ना खाएं तो बेहतर है। शोधों में पता चला है कि शॉर्ट टर्म फास्टिंग से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेजी से बढ़ता है जिससे वेट लॉस में मदद मिलती है। बरसात के मौसम में अगर आप पत्‍तेदार सब्जियों का सेवन करते हैं तो इससे आपका पाचनतंत्र प्रभावित होता है और आप डायरिया, एसिडिटी, पेट में दर्द जैसी समस्‍याओं से घिर सकते हैं। ऐसे में व्रत रखकर आप इस समस्‍या को दूर कर सकते हैं। ऐसा करने से पेट में गैस की समस्‍या भी नहीं होती है।

आयुर्वेद के मुताबिक, इन दिनों जो लोग कम खाते हैं उनका शरीर ज्यादा समय तक फिट रहता है। जबकी ज्यादा खाने वाले लोगों को पेट आदि की समस्‍या हो सकती है। यही वजह है कि इस महीने मे उपवास की परंपरा है। 12 घंटे तक उपवास करने से शरीर में डीटॉक्सिंग की प्रक्रिया शुरू होती है और बेकार कोशिकाओं को शरीर साफ करने लगता है। उपवास से नई कोशिकाओं के निर्माण में फायदा मिलता है।दरअसल व्रत रखने से शरीर में कुछ ऐसे हॉर्मोन निकलते हैं जो फैटी टिश्यूज़ को तोड़ने में मदद करते हैं।

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