बलिया जिले से आपात काल के बंदी का रिकॉर्ड गायब

लखनऊ ब्यूरो। आपात काल के दौरान ढाई साल तक बलिया जेल में कैद रहे उच्च न्यायालय के अधिवक्ता और भाजपा नेता सतीश चंद्र राय के अभिलेख रहस्यमय ढंग से गायब हो गए हैं जिससे उन्हें लोकतंत्र सेनानी की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के विशेष कार्याधिकारी केपी सिंह ने इस बावत उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है और मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा है।

राय का कहना है कि आपातकाल में उन्होंने तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ सत्याग्रह में भाग लिया था, इस नाते बलिया कोतवाली पुलिस ने उन्हें, संघ के तत्कालीन नगर प्रचारक नारायण गिरि और संतोष शुक्ल को 24 दिसंबर 1975 को मुकदमा अपराध संख्या 992/75 अंतगज़्त धारा 36,43(5) डीआईआर के तहत जेल भेज दिया गया था। जेल में वे 25 दिसंबर 1975 से 6 माचज़् 1977 तक डीआईआर और मीसा के तहत जेल में रहे। इसी आधार पर उनके सह अभियुक्तों नारायण गिरि और संतोष शुक्ल को लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया गया और वे लोकतंत्र सेनानी की सरकार प्रदत्त सभी सुविधाएं भी प्राप्त कर रहे हैं लेकिन उनका तथा 16 अक्टूबर, 1975 से 20 मई, 1976 तक निरुद्ध बंदियों का नाम रहस्यमय ढंग से जान बूझकर गायब कर दिया गया है।

राय के मुताबिक इसी तरह डीआईआर केस में पूर्व मंत्री राम गोविन्द चौधरी भी सह अभियुक्त रह चुके हैं। इसके अलावा कई अन्य प्रमुख मीसा बन्दी भी उनकी आन्दोलनात्मक गतिविधियों से पूरी तरह परिचित हैं। इसके बावजूद उन्हें लोकतंत्र सेनानी नहीं माना जा रहा है। पत्र व्यवहार में जिलाधिकारी का एक ही रटा-रटाया जवाब मिल रहा है कि आपका अभिलेख नहीं मिल रहा है। सवाल यह है कि जब उनके दो सह अभियुक्तों के दस्तावेज गायब नहीं हुए तो अकेले सतीशचंद्र राय का अभिलेख कैसे गायब हो गया। वे पिछले ढाई साल से मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मंडलायुक्त और डीएम से पत्र व्यवहार कर रहे हैं। लेकिन उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिल सका है। श्री राय का कहना है कि एक निश्चित काल खण्ड का अभिलेख जान-बूझ कर कपटपूणज़् ढंग से गायब किया गया है और लोकतंत्र के लिए संघर्ष के इतिहास में शरारतपूर्ण छेड़छाड़ की गई है।

राय ने कहा है कि वे लोकतंत्र सेनानी को मिलने वाली सुविधाओं के लालच में खुद को लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिए जाने की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि इस बहाने खुद को स्थापित करना ही उनकी इच्छा है। उन्होंने कहा है कि जब एक अधिवक्ता और पार्टी कार्यकर्ता की नहीं सुनी जा रही है तो आम जन का क्या होता होगा, इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती है। गौरतलब है कि सतीश चंद्र राय भारत सरकार के सीनियर पैनल काउंसिल हैं। वे बलिया में भारतीय जनसंघ के जिला सहमंत्री भी रह चुके हैं। 1977 में जनता पार्टी भाजपा के कार्यकारिणी सदस्य और बलिया जिले में जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। श्री राय 1980 तथा 1993 के आम चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी तथा पार्टी के विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक भी रह चुके हैं।

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