बहुत अजीब है किन्नरों की शादी, सिर्फ एक ही रात के लिए करते है ये काम

नई दिल्ली: किन्नरों का भगवान और उनके साथ विवाह की जरुरी बातें आज हम आपके सामने लेकर आये है जिसको जानकार आप हैरान हो जायेंगे और बोलेंगे क्या सच में ऐसा भी होता है? महिला और पुरुष के अलावा मनुष्य योनि में कोई तीसरा वर्ग भी होता है जिसको हम हिज्जड़े या किन्नर के नाम से जानते हैं. किन्नर को भी आज के समय में थर्ड जेंडर की संज्ञा दी गई है. किन्नर की पहचान उनके नाचने गाने वाले समुदाय के रुप मेें जानी जाती है. किन्नर कभी माता-पिता नहीं बन सकते. किन्नर दूसरों के घर- घर जाकर आपना पेट पालते हैं. जब किसी घर में कोई बच्चा जन्म लेता है या फिर जब किसी घर में शादी का मौहाल होता है तो उस घर में किन्रर खुशी के तौर पर उनकी खुशी में उनके घर पैसे लेने जाते हैं और किन्नर को खुश करने के लिए उनको देना पड़ता है. कहा जाता है कि किन्रर को कभी निराश नहीं करना चाहिए नहीं तो उनका श्राप पड़ता है.

किन्नरों के भगवान की अगर बात करे तो यह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है, किन्नरों के भगवान अर्जुन और नाग कन्या उलूपी की संतान इरावन ही है जिनको लोग अरावन के नाम से आज भी जानते है। इरावन ही किन्नरों के भगवान कैसे बने और क्यों करते है वह एक रात के लिए शादी उसका सिधेसिधा संबंध महाभारत के युद्ध से संबंधित है। यह कहानी आपको बताने से पहले आपको यह भी बता देते है की कहा पर होती है इनकी शादी और शादी के बाद क्या होता है।

आपने किन्नरों के बारें में तो सुना होगा लेकिन आज हम आपको जो किन्नर के बारें में जो खबर बताने जा रहे हैं उसके बारें में शायद आपने पहले सुना होगा. जी हां अब बात करें हैं किन्नर की शादी के बारें में कहा जाता है कि किन्नर की शादी सिर्फ एक रात के लिए होती है वो शादी उनकी भगवान से होती है. आइये जानते हैं कि कौन हैं किन्नर के भगवान. किन्नर भगवान की मूर्ति से करते हैं शादी.

किन्नर की शादी का जश्न तमिलनाडु के कुवगान जाना होगा. यहां हर साल तमिल नव वर्ष की पहली पूर्णमा से किन्नरों के शादी का उत्सव शुरु होता है. जो केवल 18 दिनों तक चलता है जिसमें 17 वें दिन किन्नर शादी करते हैं. सोलह श्रृंगार किए हुए किन्नरों को मंगलसूत्र पहनाकर शादी की जाती है और फिर…शादी के अगले दिन इरावन देवता की पूजा की जाती है और पूरे शहर में देवता की मूर्ति को घुमाया जाता है और इसके बाद उस मूर्ति को तोड़ दिया जाता है. जिसके बाद किन्नर श्रृंगार उतारकर विधवा का रुप विलाप कर लेता है. जिसके बाद वो हमेशा विधवा की तरह जिंदगी बिताते हैं. तो आइये जानते शादी से लेकर विधवा होने का पूरा सच.

बता दें कि महाभारत युद्ध से पहले पांडवो ने मांं काली की पूजा की था इस पूजा में एक राजकुमार के बलि चढ़ानी थी जब को राजकुमार अपनी बलि देने के लिए तैयार नहीं हुआ तो इरावन यानि किन्नर के देवता ने कहा कि मैं बलि देने के तैयार हूं, लेकिन बलि से पहले उन्होंने एक शर्त रखी थी कि वह बिना शादी के बलि नहीं चढ़ेगा. जिसके बाद पांडवों के पास कोई रास्ता नहीं था कि कौन सी राजकुमारी इरावन से शादी करेगी और अगले दिन ही विधवा हो जाएगी. इस समस्या का हल फिर श्री कृष्ण जी ने निकाला श्री कृष्ण ने खुद मोहिनी का रुप धारण करके इरावन से शादी करली. अगले दिन इरावन ने बलि दे दी और श्री कृष्ण ने विधवा बनकर विलाप किया इसी घटना के बाद किन्रर इरावन को अपना देवता मनाता हैं साथ ही उनकी पूजा करते हैं और हर साल तमिल की नववर्ष की पूर्णमा को शादी करते हैं.

 

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