बांझपन का कारण बन रहा सिगरेट का धुंआ

लखनऊ: तम्बाकू की खपत को बढ़ाने के लिए तंबाकू या उसके उत्पादों के विक्रय, खरीद या विज्ञापनों में शामिल कंपनियों पर हमेशा नजर रखी जाती है। यहां तक कि इसके बारे में कहा भी गया है कि अनाकर्षक पैकेजिंग और ग्राफिक स्वास्थ्य चेतावनी से भी तंबाकू की बिक्री में कमी लाने में मदद मिलती है। दुनियाभर में लगभग 1.4 अरब लोग तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं और दुनिया भर में हर साल 10 व्यक्ति में से कम से कम एक व्यक्ति की मौत तंबाकू के उपयोग के कारण होती है। 2020 तक, तंबाकू के उपयोग में 20-25 प्रतिशत तक कमी लाकर 10 करोड़ लोगों की समयपूर्व मौत को रोका जा सकता है।

टेलीविजन या रेडियो पर तम्बाकू के विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाने, तम्बाकू के खतरों और सार्वजनिक स्थानों में धूम्रपान को रोकने की आवश्यकता को प्रदर्षित करने वाले नये और प्रभावी सार्वजनिक जागरूकता अभियान जैसे धूम्रपान रोधी प्रयासों और उपायों पर अमल कर ऐसा करना संभव है। आंकड़ों से पता चलता है कि 1955 में धूम्रपान करने वालों की संख्या में 37.6 प्रतिशत की कमी आई थी जबकि 2017 में 30.9 प्रतिशत की कमी आई है।

फर्टिलिटी पर धूम्रपान का प्रभाव

धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इस सावधानी से हम अपने दैनिक जीवन में हर जगह रूबरू होते हैं। लेकिन अभी भी तम्बाकू के आदी लोग इसे अनदेखा करते हैं। तंबाकू न केवल फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है बल्कि दिल, गुर्दे और यहां तक कि शुक्राणुओं को भी नुकसान पहुंचाता है। यह पुरुषों और महिलाओं में इनफर्टिलिटी का कारण बन सकता है। चाहे तंबाकू हो या हुक्का, सच्चाई यह है कि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में धूम्रपान के कारण हर साल लगभग 60 लाख लोगों की मौत हो जाती है। हाल के शोध से पता चलता है कि 18 वर्ष से अधिक उम्र की चार में से लगभग एक महिला धूम्रपान करती है। धूम्रपान का एक्टोपिक गर्भावस्था से संबंध हो सकता है और इसके कारण फैलोपियन ट्यूबों में समस्या आ सकती है। एक्टोपिक गर्भावस्था में, अंडे गर्भाशय तक नहीं पहुंचते हैं और इसकी बजाय फलोपियन ट्यूब के अंदर प्रत्यारोपण हो जाते हैं।

डॉ सागरिका का कहना है की धूम्रपान महिलाओं में इनफर्टिलिटी की संभावना को 60 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।इसके कारण गर्भाशय में परिवर्तन आ सकता है जिसके कारण गर्भाशय कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।सिगरेट में मौजूद रसायन अंडाशय के भीतर एंटीऑक्सीडेंट स्तर में असंतुलन पैदा कर सकते हैं। यह असंतुलन निषेचन को प्रभावित कर सकता है और स्पष्ट है कि इसके बाद इम्प्लांटेशन में कमी आ जाएगी।

तम्बाकू का पुरुष प्रजनन क्षमता पर भी भारी दुष्प्रभाव पड़ता है। यह रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है। कुछ अध्ययनों में धूम्रपान के प्रभाव का इरेक्टाइल डिस्फंान और यौन प्रदर्शन में कमी से भी संबंध पाया गया है। तम्बाकू के कारण क्रोमोसोम को भी क्षति पहुंच सकती है और शुक्राणु में डीएनए फ्रैगमेंटेशन हो सकता है। धूम्रपान शुक्राणु को नुकसान पहुंचाते हैं जिसके कारण निषेचन की संभावना कम हो जाती है। धूम्रपान करने वाले लोगों के शुक्राणुओं से विकसित भ्रूण में डीएनए की क्षति के कारण उसके जीवित रहने की संभावना कम होती है। आईवीएफ भी प्रजनन क्षमता पर धूम्रपान के दुष्प्रभाव को पूरी तरह से काबू पाने में सक्षम नहीं हो सकता है।

धूम्रपान करने वाली महिला को आईवीएफ के दौरान अंडाशय को उत्तेजित करने वाली अधिक दवा लेने की आवश्यकता होती है और फिर भी रिट्रीवल के समय कम अंडे होते हैं। इसके अलावा धूम्रपान करने वाली आईवीएफ रोगियों में धूम्रपान नहीं करने वाली महिलाओं की तुलना में गर्भावस्था दर 30 प्रतिशत कम होती है। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने से गर्भस्थ बच्चे को भी नुकसान पहुंच सकता है। यहां तक कि धूम्रपान करने वाली महिलाओं में समय पूर्व प्रसव पीड़ा हो सकती है और स्वास्थ्य समस्याओं से पीडि़त बच्चों को जन्म दे सकती हैं।

डॉ सागरिका अग्रवाल , स्त्री रोग विशेषज्ञ , इंदिरा आई वी एफ हॉस्पिटल , नई दिल्ली

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