बाबरी विध्वंस की तिथि पर रामजन्मभूमि फिल्म का दूसरा पोस्टर जारी

लखनऊ ब्यूरो। बाबरी विध्वंस की बेहद संवेदनशील तिथि छह दिसम्बर को शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने अपने फिल्म रामजन्मभूमि फिल्म का दूसरा पोस्टर जारी कर दिया है। इससे पहले वसीम रिजवी को डॉन टाईगर मेमन के भाई अब्दुल मेमन की धमकी मिल चुकी है।

गुरुवार को पोस्टर जारी के मौके पर वसीम रिजवी ने कहा कि किसी एक इमारत के गिरने से बड़ी घटना निहत्थे इंसानों का कत्लेआम है। वर्ष 1528 में बाबर के सेनापति मीर बकी ने अयोध्या में राम मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनवाई थी। मंदिर तोड़ते वक्त 10 हजार से ज्यादा हिन्दू उसकी रक्षा में मारे गए थे। इसके बाद से हिन्दू समाज एक दिन भी चुप नहीं बैठा। वह लगातार इस स्थान को पाने के लिए संघर्ष करता रहा। 1984 में राम मंदिर को लेकर हिंदू संगठनों ने समिति का गठन किया। इसके 3 साल बाद जिला अदालत ने मस्जिद का दरवाजा खोलने का आदेश देते हुए हिंदुओं को विवादित ढांचे के अंदर पूजा की इजाजत दे दी। उसके बाद मुस्लिम समुदाय ने बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया। विवादित जगह के पास ही मंदिर बनाने के लिए शिलाएं रखी गईं।

अयोध्या में 30 अक्टूबर 1990 को श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के लिए पहली कारसेवा हुई थी। प्रदेश सरकार की बंदिशों के बावजूद लाखों कारसेवक 30 अक्टूबर से 02 नवम्बर के बीच अयोध्या पहुंच गये थे। प्रशासन ने अयोध्या में कर्फ्यू लगा रखा था, इसके चलते श्रद्धालुओं के प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। पुलिस ने बाबरी मस्जिद के 1.5 किलोमीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर रखी थी। कारसेवकों की भीड़ बेकाबू हो गई थी। पहली बार 30 अक्टबूर, 1990 को कारसेवकों पर चली गोलियों में पांच लोगों की मौत हुई थी।

इस घटना के बाद अयोध्या से लेकर देश का माहौल पूरी तरह से गरमा गया। इस गोलीकांड के दो दिनों बाद ही 02 नवम्बर को हजारों कारसेवक हनुमान गढ़ी के करीब पहुंच गए थे। उमा भारती, अशोक सिंघल जैसे बड़े हिन्दूवादी नेता कारसेवकों का नेतृत्व कर रहे थे। ये नेता अलग-अलग दिशाओं से कारसेवकों के जत्थे के साथ हनुमान गढ़ी की ओर बढ़ रहे थे। प्रशासन उन्हें रोकने की कोशिश कर रहा था, लेकिन 30 अक्टूबर को मारे गए कारसेवकों के चलते रामभक्त गुस्से से भरे थे। आसपास के घरों की छतों तक पर बंदूकधारी पुलिसकर्मी तैनात थे और किसी को भी बाबरी मस्जिद तक जाने की इजाजत नहीं थी।

02 नवम्बर को सुबह का वक्त था। अयोध्या के हनुमान गढ़ी के सामने लाल कोठी की संकरी गली में कारसेवक बढ़े चले आ रहे थे। पुलिस ने सामने से आ रहे कारसेवकों पर फायरिंग कर दी, जिसमें सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब डेढ़ दर्जन कारसेवकों की मौत हो गई।

साल 1990 में ही  वरिष्‍ठ बीजेपी नेता लालकृष्‍ण आडवाणी ने  राम मंदिर के लिए जनसमर्थन जुटाने के उद्देश्य से देशभर में रथयात्रा निकाली।। वे अयोध्‍या की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन बिहार के समस्‍तीपुर में तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद की सरकार ने उन्‍हें रोक दिया और गिरफ्तार कर लिया।लोगों में तत्कालीन केन्द्र और राज्य सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा था। यह आक्रोश उस बाबरी ढांचे के खिलाफ था, जो गुलामी का प्रतीक था। रामभक्त उसे किसी भी हालत में देखना नहीं चाहते थे। ढांचा 6 दिसंबर, 1992 को रामभक्त कारसेवकों द्वारा ढहा दिया गया।

इसके बाद पूरे देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। 16 दिसंबर को घटना की जांच के लिए लिबरहान आयोग का गठन हुआ। आयोग ने 17 साल बाद जून 2009 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। 2002 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की 3 सदस्यीय पीठ ने विवादित जमीन के मालिकाना हक की सुनवाई शुरू की। उसी साल फरवरी में गुजरात के गोधरा में ट्रेन में आग लगा दी गई, जिसमें अयोध्या से कारसेवक लौट रहे थे। इसमें 58 लोग मारे गए। इसके बाद पूरे प्रदेश में दंगा फैल गया और 2,000 से अधिक लोगों की जान चली गई।

इसी घटना पर आधारित फिल्म रामजन्म भूमि का जब से पोस्टर एवं ट्रेलर जारी हुआ है। उसी समय से दुनिया के कोने कोने से कट्टरपंथी समाज के लोगों की उनके पास धमकियां आ रही है। रिजवी ने कहा कि टाईगर मेमन जो मुंबई ब्लास्ट का आरोपी है और एक बड़ा डॉन है। उसका भाई अब्दुल मुझ पर फिल्म खरीदने और उसे नष्ट कर देने की धमकी देता है। फिल्म को सिनेमा घरों में न लगने देने तक की धमकी देता है। हम शिया मुसलमान है, इस वजह से हमें और ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है। रामजन्म भूमि के संबंध में जो मेरे विचार है, वह इस्लामिक सिद्धांतों के अनुसार हक का साथ देने के लिए है। हर मुस्लिम का यह फर्ज है कि वह इन्सानियत का पैरोकार हो और किसी भी धर्म का भेदभाव बगैर हक का साथ दे।

उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि​ फिल्म का दूसरा पेास्टर रिलीज कर दिया गया है। इस पोस्टर में इंसानियत की तस्वीर है, फिल्म की कहानी इसे देखकर समझ में आती है। यह फिल्म किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज में बुराईयों के खिलाफ लड़ाई है। फिल्म को जनवरी माह के पहले सप्ताह में सिनेमाघरों में लाने जा रहें है।

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