बाबा केदारनाथ के जयकारों से गुंजायमान केदारपुरी, खुले कपाट, छह माह होगी पूजा

रुद्रप्रयाग। छह महीने लंबे शीतकाल प्रवास के बाद भगवान शिव के 11 वें ज्योतिर्लिंग बाबा केदारनाथ ने अपने भक्तों के इंतजार को विराम देते हुए उन्हें पहला दर्शन गुरुवार सुबह ब्रह्मवेला में दिए। अब आने वाले छह महीनो तक भोले बाबा की पूजा यहीं पर होगी। भारी बर्फबारी के बावजूद प्रशानिक आधिकारियों के साथ देश-विदेश से आए लगभग पांच हजार से अधिक भक्त इस शुभ असवर के गवाह बने। सेना की जम्मू-कश्मीर लाईट इंफेंटरी के बेंड की धुनों ने पूरा केदारनाथ का वातावरण भोले बाबा के जयकारों से गुंजायमान हो गया।

हिमालय पर्वतश्रृंखलाओं में स्थित केदारनाथ मन्दिर एक प्रमुख तीर्थस्थल है जहां पर हिन्दू भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग स्थापित है। केदारनाथ का ज्योतिर्लिंग 3584 मी की ऊंचाई पर स्थित है और बारहों ज्योतिर्लिंगों में सबसे महत्वपूर्ण है। बाबा केदारनाथ के कपाट शीतकाल प्रवास के बाद शुभ लग्नानुसार गुरूवार सुबह ठीक 5 बजकर 35 मिनट पर आम भक्तों के दर्शनाथ खोल दिए गए हैं। इस दौरान केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग और पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद रमेश पोखरियाल निशंक सहित बीकेटीसी के सदस्य भी मौजूद रहे। अब आने वाले छह महीनो तक भोले बाबा की पूजा यहीं पर होगी। देश विदेश से आने वाले यात्री केदार बाबा का आशीर्वाद ले सकेंगे।

गुरूवार सुबह तड़के चार बजे से ही केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तैयारियां मंदिर समिति द्वारा शुरू कर दी गई थी। बाबा केदार की उत्सव डोली को मुख्य पुजारी केदार लिंग द्वारा भोग लगाने के साथ ही नित पूजाएं की गई, जिसके बाद डोली को सजाया गया। केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग, वेदपाठियों, पुजारियों, हक्क हकूकधारियों की मौजूदगी में कपाट पर वैदिक परंपराओं के अनुसार मंत्रौच्चारण किया गया और ठीक 5 बजकर 35 मिनट पर सीलबंद कपाट खोले गए। डोली ने मंदिर में प्रवेश किया।सर्वप्रथम पुजारियों व वेदपाठियों ने गर्भगृह में साफ सफाई गई, भोग लगाया गया। मंदिर के अंदर पूजा अर्चना की गई। जिसके बाद ठीक 6 बजे मुख्य कपाट भक्तों के दर्शनाथ खोल दिए गए। भगवान केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले एयरफोर्स की मदद से पूजा सामग्री मंदिर पहुंचाई गई। जून 2013 की आपदा के बाद यह पहला मौका है, जब केदारनाथ यात्रा में मई माह के दूसरे सप्ताह में भी पैदल मार्ग व धाम में कई फीट बर्फ मौजूद है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने श्रद्धालुओं की सुखद व मंगलमय यात्रा की कामना करते हुए चारधाम में अाने वाले सभी भक्तों के लिए राज्य सरकार की और से बेहतर प्रबंध किए है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगोत्री व यमुनोत्री के बाद आज केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए। अब शुक्रवार 10 मई को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे। केदारनाथ के लोगों का कहना है कि केदारनाथ यात्रा का शुभारंभ केदारघाटी के लिए वर्ष का नया दिन जैसा होता है। इस दिन से यहां के लोग अपने नए कार्यो का शुभारंभ करते हैं। साथ व्यवसाय लेखाजोखा तैयार करते हैं। बाबा केदार, उनके आराध्य के साथ पालनकर्ता और संरक्षक भी हैं। तीर्थ पुरोहित, सदियों से यात्रा में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। बाबा केदार की यात्रा से केदारघाटी के 80 से अधिक गांवों के हजारों परिवार जुड़े हैं। जो यात्रामार्ग, पड़ावों व धाम में व्यवसाय करते हैं। कपाट खुलने के पावन दिन से उनकी वर्षभर की आजिविका शुरू होती है। यात्रा में गुप्तकाशी से केदारनाथ तक हजारों लोग रोजगार करते हैं, जिससे कई परिवारों की रोजी-रोटी चलती है। इस वर्ष भी यात्रा को लेकर लोगों में खासा उत्साह है।

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