बाबा विश्वनाथ का बैंक बैलेंस है 17 करोड़, भले ही रहते हों कैलाश पर!

लखनऊ ब्यूरो: देवाधिदेव महादेव भगवान भोलेनाथ भले ही कैलाश पर्वत पर सादगी के साथ रहते हो, लेकिन उनके भक्त बाबा का बैंक बैलेंस कम नहीं होने देना चाहते। यही वजह है कि द्वादश ज्योतिर्लिंग में शामिल श्रीकाशी विश्वनाथ का बैंक बैलेंस बीते 8 सालों में 3 गुना से भी ज्यादा हो गया है। विश्वनाथ मंदिर के प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो जहां 2010 में बाबा के बैंक खाते में 5 करोड़ रुपये थे। वहीं 2018 फरवरी तक काशी विश्वनाथ के बैंक अकाउंट में 17 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की रकम जमा की जा चुकी है। इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

करोड़ों की आस्था का केंद्र श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर जहां पर हर रोज हजारों की संख्या में भक्तों का आना होता है। देश के अलग-अलग कोनों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन के लिए भक्त पहुंचते हैं। यही वजह है कि बाबा के दरबार में आने वाले चढ़ावे में दिनों दिन बढ़ोतरी होती जा रही है।

अगर आंकड़ों पर गौर करें तो 2010-11 में बाबा विश्वनाथ के बैंक खाते में 5 करोड़ 93 लाख 43 हजार 979 रूपये थे, जो 2011-12 में बढ़कर 9 करोड़ 62 लाख 89 हजार 989 रुपये हो गए। 2012-13 में यह बढ़कर 11 करोड़ 91 लाख 12 हजार 36 रुपये हो गए, जबकि 2013-14 में इसमें और कुछ कमी आई। पिछले साल के मुकाबले यह घटकर 11 करोड़ 58 लाख 37 हजार 619 रुपये हो गई, लेकिन 2014-15 में इसमें फिर से बढ़ोतरी हुई और बाबा का बैंक बैलेंस 12 करोड़ 25 लाख 46 हजार 595 रुपये हो गया। सबसे शानदार साल 2015- 16 का रहा क्योकि इस साल अकेले बाबा के बैंक बैलेंस में करीब 5 करोड़ की बढ़ोतरी हुई और ये पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले बढ़कर 17 करोड़ 66 लाख 71 हजार 86 रूपये पर पहुंच गया।

नोटबंदी के दौरान बाबा के बैंक बैलेंस में भी थोड़ी कमी जरूर आई और 2016- 17 में चढ़ावे के जरिए आने वाली रकम 17 करोड़ से घटकर 16 करोड़ 97 लाख 98 हजार 921 रुपये हो गई। हालांकि 2017-18 में फरवरी माह तक बाबा के बैंक खाते में दान व गुप्तदान सोना और चांदी हुआ। कुंडलियों के माध्यम से आने वाली रकम को बैंक खाते में जमा कराया जा चुका है और यह 17 करोड़ 21 लाख 74 हजार 528 रूपये है।

इस बारे में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है कि बाबा के प्रति लोगों की आस्था हमेशा से रही है। इसलिए लोग यहां पर चढ़ावे के रूप में सिर्फ पैसे ही नहीं बल्कि सोना-चांदी, प्रॉपर्टी व अन्य चीजें भी चढ़ाते हैं। आए रुपयों को तो सीधे बैंक खाते में डाल दिया जाता है, लेकिन सोना व चांदी या अन्य कोई भी कीमती वस्तु की लागत को वित्तीय वर्ष में होने वाली आय के रूप में जोड़ा जाता है। यह 8 वर्षों में लगभग 3 गुने से भी ज्यादा हो चुकी है।

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