बारुदी सुरंग रोधी वाहन में दबकर मर रहे हैं जवान, न कि विस्फोट से

रायपुर: बारुदी सुरंग रोधी वाहन जवानों के लिए काल बन गए हैं। सीआरपीएफ के पूर्व प्रमुख विजय कुमार ने यह बात यूं ही नहीं कही थी। आए दिन नक्सली सीआरपीएफ के इन वाहनों को निशाना बना रहे हैं। इसके बावजूद बारुदी सुरंग रोधी वाहनों को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। जानकारों की मानें तो मौजूदा बारुदी सुरंग रोधी वाहन नक्सलियों के विस्फोट के आगे बेबस हैं। एक विस्फोट में यह वाहन 15 से 20 फीट हवा में उछल जाते हैं, जिसका नतीजा यह होता है कि वाहन में बैठे जवानों को विस्फोट से तो कोई खास नुकसान नहीं होता है, लेकिन हवा में उछले वाहन के नीचे गिरने पर उसमे बैठे जवान वाहन में दब जाते हैं।

सिर और गर्दन में उन्हें गंभीर चोट आती है और उनकी मौत तक हो जाती है। इसके बारे में सीआरपीएफ से रिटायर्ड आईजी वीएस पनवर का कहना है कि सभी बारुदी सुरंग रोधी वाहन विस्फोट में काम नहीं करते हैं। अधिकारियों को चाहिए कि नई तकनीक और नक्सलियों की मौजूदा विस्फोट तकनीक का सामना करने वाले वाहन खरीदे जाएं। जानकारों की मानें तो सीआरपीएफ के पास जो मौजूदा बारुदी सुरंग रोधी वाहन हैं, उनकी क्षमता 10 से 15 किलोग्राम तीव्रता का विस्फोट झेलने की है, जबकि नक्सली 50 किलोग्राम या उससे ज्यादा की तीव्रता वाले विस्फोट कर रहे हैं। इसका नतीजा यह होता है कि वाहन ऊपर तक उछल जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि सीआरपीएफ को करीब 600 से ज्यादा वाहनों की जरूरत है। लेकिन उसे मिले हैं सिर्फ 170 वाहन।

इन वाहनों की कीमत 127.50 करोड़ रुपए बताई जा रही है। हालांकि नई तकनीक वाले वाहनों के लिए वाहन निर्माणी जबलपुर को ऑर्डर दिया जा चुका है। लेकिन सूत्रों की मानें तो वहां भी अभी वाहनों का निर्माण उस स्तर पर शुरु नहीं हुआ है। अगर पिछले कुछ समय में बारुदी सुरंग रोधी वाहनों को नक्सलियों द्वारा निशाना बनाए जाने की घटना पर नजर डालें तो अक्टूबर 2012 गया में पांच जवानों की मौत हो गई। जनवरी-2012 में झारखंड में 13 जवानों की मौत हो गई।

अप्रैल-2015 में दांतेवाड़ा में चार जवान शहीद हो गए। जनवरी और मई-2017 में गया और महाराष्ट्र में पांच जवान नक्सलियों द्वारा बारुदी सुरंग रोधी वाहन पर किए गए हमले में शहीद हो गए। इस बारे में जब सीआरपीएफ के डीआईजी एन. दिनाकरन से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि नक्सली उच्च तीव्रता वाले विस्फोट कर रहे हैं, जिसके आगे हमारे बारुदी सुरंग रोधी वाहन बेअसर साबित हो रहे हैं। हर वाहन की क्षमता अलग होती है। यही वजह है कि नक्सली अब 50 किलोग्राम या उसे अधिक वजन के विस्फोट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper