बाल कल्याण समिति ने जिला जेल का किया निरीक्षण, बच्चियों का जाना हाल

बुधवार को बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्य ने जिला जेल में निरुद्ध महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों की जानकारी ली एवं जेल का निरीक्षण किया। समिति को 9 शिशुओं जो अपनी माताओं के साथ जिला कारागार में रह रही है। जिला कारागार रायबरेली का निरीक्षण किया इस दौरान समिति ने महिला बैरक को भी देखा और वहां उपस्थित महिलाओं से उनका हाल चाल भी पूछा। बच्ची की स्वास्थ्य, खानपान व मनोरंजन की जानकारी ली गई। इसके बाद कारागार के जेल अधीक्षक अविनाश गौतम व जेलर सत्यप्रकाश व अन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर महिलाओं एवं समाज कल्याण विभाग से संबंधित विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। जेल अधीक्षक अविनाश गौतम व जेलर सत्यप्रकाश ने जेल परिसर की साफ सफाई, रखरखाव व खानपान की जानकारी दी। जेलर सत्यप्रकाश ने महिलाओं के मनोरंजन के लिए संगीत सीखने व कोई वाद्य यंत्र बजाने की बात की। वहीं काष्ठ कार्य व मिट्टी के कार्य के संबंध में भी बताया।

वहीं जेलर ने यह भी बताया कि यहां महिलाओं के लिए सिलाई कढ़ाई की भी व्यवस्था की जाती है। और ब्यूटी टिप्स के लिए भी व्यवस्था है जो यहां की महिलाओं को लाभ मिल रहा है। बाल कल्याण समिति ने संयुक्त रूप से वहां निर्वासित महिलाएं व बच्चों के लिए भी जानकारी दी। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ओजस्कर पाण्डेय ने कहा कि देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले जेल में बालक, बालिकाओं के आवासिक सुविधाओं का निरीक्षण दौरा करना और जिला बालक संरक्षण एकक और राज्य सरकार को सेवाओं की क्वालिटी में सुधार करने के लिए कार्रवाई करने की सिफारिश करना है। उन्होंने बताया कि कैदियों की मनोदशा बदलने वाले प्रेरकीय कार्य करने की जरूरत है। ताकि कैदियों को जीवन जीने की नई दिशा प्रदान की जाए। इस अवसर पर बाल कल्याण समिति के सदस्य मिलिंद द्विवेदी ने बताया कि बाल मनोविज्ञान को जानकारी की जरूरत है। सामान्यतः यह माना जाता रहा है कि मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति से बालक की आवश्यकतायें सन्तुष्ट की जा सकती है।

बाल कल्याण समिति की पूनम सिंह सदस्य, सदस्य रूपा गुप्ता ने जेल में बंदियों को कुटीर उद्योग के जरिए मोमबत्ती, साबुन, बांस उत्पादित वस्तुओं को बनाने, महिला बंदियों को सिलाई-कढ़ाई आदि का प्रशिक्षण देने की बात की। इससे आमदनी तो बढ़ेगी ही बंदियों और कैदियों को भी रोजी कमाने का अवसर मिलेगा। निरीक्षण के अंत में शिशुओं को बिस्किट एवं टॉफी वितरित की गई।

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