बाल कल्याण समिति व बाल संरक्षण इकाई ने साइबर अपराध व सुरक्षा के बारे में जाकरूक किया

रायबरेली, इसमें देश-दुनिया के साइबर अपराध की घटनाओं और उनकी रोकथाम के तरीकों का जिक्र करती है. ताकि देश के नागरिकों को जागरुक किया जा सके। सरकार ने स्कूल कॉलेजों में प्रत्येक माह के पहले बुधवार को ‘साइबर जागरुकता दिवस’ मनाने का निर्देश भी दिया है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए बुधवार को बाल कल्याण समिति व जिला बाल संरक्षण इकाई, रायबरेली द्वारा बीएसएस स्कूल में 11वीं के बच्चों को साइबर क्राइम की पूरी जानकारी देकर उन्हें जागरूक किया गया।

देश में बढ़ते साइबर अपराध को देखते हुए अब स्कूलों में भी साइबर के बारे में बताया जाए। जिससे आने वाली पीढ़ी साइबर अपराध को पहचाने और इससे बचे रहें। स्कूल के बच्चों को महिला कल्याण विभाग के संबंध में पूजा अवस्थी ने वक्ताओं से बच्चों का परिचय कराया। साइबर क्राइम की जानकारी देते हुए बाल संरक्षण अधिकारी वीरेंद्र पाल ने बच्चों को सरकार द्वारा चलायी जा रही नीतियों के बारे में विस्तार से बताया। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों को 181 व 1098 की जानकारी भी दी। बच्चों को समाज में उत्थान के लिए साइबर क्राइम के चंगुल से बचने की जरूरत पर जोर दिया।

बाल कल्याण समिति के सदस्य मिलिंद कुमार द्वेदी ने बताया कि कोरोना के बाद ऑनलाइन शिक्षा का चलन बढ़ा है। जिसके चलते विद्यार्थियों के साथ ऑनलाइन अपराध होने की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। इसलिए अब साइबर अपराध को लेकर विद्यार्थियों को जागरूक करना आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्मार्टफोन उपयोग में लेने से पहले सर्वप्रथम अपने आपको ‘स्मार्ट’ बनाने की जरूरत है। इसमें स्मार्ट उपकरणों की सुरक्षा, फोन में ऑनलाइन ठगी से सावधानी, सोशल मीडिया का शिष्टाचार से उपयोग करने की जरूरत है।

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ओजस्कर पाण्डेय ने बताया कि साइबरस्पेस नेटवर्क, संबंधित हार्डवेयर और डिवाइस सॉफ्टवेयर और उनमें शामिल और संचार करने वाली जानकारी, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरों सहित सभी खतरों से संबंधित सॉफ्टवेयर और डेटा शामिल हैं, की सुरक्षा के लिये गतिविधि और अन्य उपाय किये जाते हैं। उन्होंने बताया कि साइबर अपराध, जिसे कंप्यूटर अपराध भी कहा जाता है, कंप्यूटर का उपयोग एक उपकरण के रूप में अवैध उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे धोखाधड़ी करना, चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी में तस्करी और बौद्धिक संपदा की चोरी करना या गोपनीयता का उल्लंघन करना। अधिकांश साइबर अपराध व्यक्तियों, निगमों या सरकारों के बारे में जानकारी पर हमला है।

हालांकि हमले पारंपरिक आपराधिक गतिविधि के रूप में भौतिक शरीर पर नहीं होते हैं, वे व्यक्तिगत या कॉर्पोरेट आभासी निकाय पर होते हैं, जो सूचनात्मक विशेषताओं का समूह है जो इंटरनेट पर लोगों और संस्थानों को परिभाषित करता है। इस अपराध से बचने की जरूरत है। इस मौके पर स्कूल के बच्चों के साथ, प्रिंसिपल, व्यवस्थापक, बाल कल्याण समिति के सदस्य पूनम सिह, रुपा गुप्ता, मिलिंद कुमार द्वेदी और बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ओजस्कर पाण्डेय व बाल संरक्षण अधिकारी वीरेंद्र पाल, व पूजा शुक्ला उपस्थित रहे।

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