बाल श्रम पर अंकुश के लिए चलाया गया अभियान

रायबरेलीः अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन गृह (पुलिस) अनुभाग-15 लखनऊ के शासनादेश संख्या 158/छः-पु0-15/2022-1007/2020टीसी-1के क्रम में जनपद में बाल श्रम के खिलाफ अभियान चलाया गया। जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रतिष्ठानों में काम कर रहे बच्चों को वहां से मुक्त कराया गया। बालश्रम से मुक्त कराए गए बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन गृह (पुलिस) के निर्देश पर बाल श्रम के खिलाफ अभियान चलाया गया। इस अभियान के साथ शहर में संचालित दुकान पर लोगों को बाल श्रम के प्रति जागरूक भी किया। टीम के सदस्यों ने कस्बे में स्थित होटल, गैराज आदि प्रतिष्ठान मालिको को बाल श्रम कानून एवं दण्ड के बारे में अवगत कराया गया।

टीम के सदस्यों ने लोगों को बाल श्रम, बाल विवाह आदि के बारे जागरूक करते हुए बताया गया कि बाल श्रम कराना कानून अपराध है। कोई भी बच्चा बाल श्रम करता हुआ पाया गया तो दुकान मालिक के ऊपर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जानकारी दी गई कि यहां 0 से 18 वर्ष के सभी बच्चों के सहायता के लिए चाइल्ड लाइन आपातकालीन फोन सेवा है। जिसके तहत बच्चों को सारी सुविधाएं निशुल्क है। दुकानदारों को बताया गया कि यदि कोई भी बच्चा आपको मुसीबत में दिखाई देता है तो तत्काल 1098 पर सूचित करें। क्योंकि हमारी साथी हमेशा आपके साथ है। बच्चो के सहायता के लिए चाइल्ड लाइन 1098 हमेशा 24 घंटे कार्य करती हैं।

जनपद में बाल श्रम की दिनों दिन बढ़ती समस्या के विरूद्ध श्रम विभाग, जिला प्रोबेशन विभाग एवं जिला बाल संरक्षण ईकाई के संयुक्त तत्वावधान में शहर के विभिन्न स्थानों पर सघन रूप से “बाल श्रम उन्मूलन अभियान” का संचालन किया गया। बाल श्रमिक संभावित प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर कुल 8 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया। मुक्त कराये गये बाल श्रमिक 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के हैं। बाल श्रम के विरूद्ध हुई इस औचक कार्यवाही से बाल श्रमिक नियोजकों में हड़कंप की स्थिति है। बताते चलें कि इस पूरे अभियान की सूचना पूर्णतया गोपनीय रखी गयी थी।

इस संबंध में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ओजस्कर पाण्डेय ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सतत विकास लक्ष्य के तहत 2025 तक दुनिया से बाल श्रम खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। पूरी दुनिया से 2025 तक बाल श्रम को समाप्त करने और सतत विकास लक्ष्या को प्राप्त करने हेतु, कॉरपोरेट नेताओं, धर्मगुरु, यूनियनों और युवा नेताओं को लामबंद करने का प्रयास किया जा रहा है।

जिला प्रोबेशन अधिकारी जयपाल वर्मा ने बताया कि हम न्यायपूर्ण और समानता की एक नई संस्कृति विकसित करने के लिए बच्चोंे के लिए एक उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। इनकी बातों को आगे बढ़ाते हुए बाल कल्याण समिति के सदस्य मिलिंद द्विदी ने बताया कि यह मानवता के खिलाफ सदियों पुराने बाल श्रम के अपराध को समाप्त कर देगी। हम इस अभियान के लिए अब आगे बढेंगे, ताकि सभी बच्चोंल को उनका हक मिल सके।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बाल श्रम के जरिए बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले से बचाना है। जिन भी नियोजकों के यहां से बाल श्रमिक मुक्त कराए गए हैं उनके विरूद्ध बाल श्रम अधिनियम, बंधुआ मजदूरी अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम एवं अनैतिक देह व्यापार अधिनियम आदि कानूनों के अंतर्गत मुकदमें दर्ज किए जाएंगे। बताते चलें कि इस अभियान के लिये टीमों का गठन किया गया था। जिसमें एक-एक उप निरीक्षक, 5-5 कांस्टेबल, संबंधित सरकारी विभागों, स्वैच्छिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था। इस अभियान में मानव तस्करी इकाई के शरद कुमार, श्रम विभाग से शैलेंद्र यादव, जिला प्रोबेशन अधिकारी जयपाल वर्मा, बाल संरक्षण अधिकारी बीरेंद्र पाल, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष ओजस्कर पाण्डेय, सदस्य मिलिंद द्विदी, सदस्य रुपा गुप्ता, जीआरापी एवं आरपीएफ के अधिकारी शामिल रहे।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... -------------------------
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper